भोपाल: शास्त्रीय संगीत की मधुर धुनों के बीच रवीन्द्र भवन का सभागार शुक्रवार शाम ऐसी तल्लीनता से भर गया मानो समय थम सा गया हो। सरोद के तार और तबले की थाप जुगलबंदी में जब एक दूसरे से संवाद करती प्रतीत हुई तो दर्शक दीर्घा में बैठे लोग उसी सुर संसार में खोते चले गए। आठवें हृदय दृश्यम समारोह की पहली शाम संगीत की इसी अलौकिक यात्रा को समर्पित रही।समारोह का शुभारंभ संस्कृति और पर्यटन विभाग द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन सुशील प्रकाश ने दिया और आभार व्यक्त डॉ पूजा शुक्ला ने किया।
अमान अयान की सरोद जुगलबंदी ने बांधा समां
सभागार में शास्त्रीय संगीत से मंच संभालने का कार्य सेनिया बंगश घराने के सुप्रसिद्ध युवा सरोद वादक अमान अली बंगश और अयान अली बंगश ने किया। दोनों कलाकारों ने राग देश की कोमल छाया से सुरों का ऐसा वातायन रचा कि पूरे माहौल में एक सुकून भरी नमी उतर आई। इसके बाद राग रागेश्री के गंभीर और मधुर विस्तार ने सरोद की भावनात्मक गहराई को नए आयाम दिए। अंत में प्रस्तुत भटियाली धुन ने सभा में सहज उल्लास और काव्यमय मिठास घोल दी। तबले पर अशेष उपाध्याय और रामेंद्र सिंह सोलंकी की सुगठित संगत ने हर आलाप और हर गति को जीवंत कर दिया।
मधुवंती की सुर लहरियों में खो उठा सभागार
दूसरी प्रस्तुति में जब सुरीली गायिका मधुवंती बागची मंच पर आईं तो सभागार का माहौल पल भर में बदल गया। उनकी आवाज की मिठास ऐसी थी कि लगा जैसे श्रोताओं को किसी और ही दुनिया में ले गई हो। दर्शक एकदम सजग होकर हर सुर को अपने भीतर महसूस करने लगे। जैसे ही उन्होंने ये मोह मोह के धागे तेरी उंगलियों से जा उलझे गाया तो सभागार में बैठे लोग अनायास ही धीमे स्वर में गुनगुनाने लगे। जरा जरा महकता है महकता है की नरम लय पर सभी श्रोता मन ही मन झूम उठे। इसके बाद हमरी अटरिया पे आजा रे सवरियां की लोक सुगंध भरी धुन ने माहौल को और जीवंत कर दिया।
