रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा और 23 वें वार्षिक शिखर सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक भू-राजनीति कितनी भी बदले, भारत-रूस संबंध अपनी रणनीतिक स्थिरता नहीं खोते. यूक्रेन संघर्ष के बीच रूस पर बढ़ते पश्चिमी दबाव, ऊर्जा बाज़ारों में उथल-पुथल और एशिया में शक्ति-संतुलन बदलने की हलचल—इन सबके बीच यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास, पारस्परिक सहयोग और दीर्घकालिक साझेदारी का एक सशक्त संदेश देती है. सबसे महत्वपूर्ण प्रगति रक्षा क्षेत्र में हुई है. लंबे समय से लंबित रिसिप्रोकल एक्सचेंज का लॉजिस्टिक्स सपोर्ट समझौते को अब अंतिम रूप मिल चुका है. यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के सैन्य अड्डों और तकनीकी ढांचों के उपयोग की अनुमति देता है. ऐसे समय में जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता बढ़ रही है, यह व्यवस्था भारतीय नौसेना और वायुसेना के संचालन को एक नई ताकत देती है. इसके साथ ही एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की समयबद्ध आपूर्ति और अतिरिक्त रेजिमेंटों की संभावित खरीद पर चर्चा, भारत की वायु सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है. मेक इन इंडिया के तहत एके – 203 राइफलों, ब्रह्मोस मिसाइलों, और एस यू – 30 एमकेआई के इंजन अपग्रेड पर सहमति भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता मिशन को गति देगी. यह महज हथियारों का सौदा नहीं, बल्कि तकनीक हस्तांतरण का बड़ा अवसर है, जो आने वाले वर्षों में भारतीय सैन्य उद्योग की रीढ़ मजबूत कर सकता है. व्यापार और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में हुए समझौते भी कम अहम नहीं. दोनों देशों ने 2030 तक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. यह लक्ष्य केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि ऊर्जा, उर्वरक, स्टील, इंफ्रास्ट्रक्चर और उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में गहन सहयोग का संकेत है. उल्लेखनीय है कि भारत और रूस के बीच व्यापारिक लेन-देन में 96 फीसदी भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं—रुपया-रूबल—में हो रहा है. यह कदम डॉलर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव है और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है. ऊर्जा सुरक्षा भी इस दौरे का महत्वपूर्ण पहलू रही. रूस ने भारत को निरंतर और स्थिर ईंधन आपूर्ति का आश्वासन देकर लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को पुन: पुष्टि की है. वहीं, फ्लोटिंग न्यूक्लियर प्लांट्स और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर सहयोग की संभावनाएं भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं. उर्वरक क्षेत्र में संयंत्र स्थापित करने का समझौता, कृषि अर्थव्यवस्था को स्थिरता देगा. कूटनीति के मोर्चे पर जारी संयुक्त बयान में आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई को केंद्र में रखा गया. पहलगाम और क्रोकस सिटी हॉल जैसे हमलों का संदर्भ, दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग की गहराई को रेखांकित करता है. साथ ही, यूएन, जी 20, ब्रिक्स और एससीओ जैसे मंचों पर मिलकर कार्य करने का संकल्प बताता है कि वैश्विक मुद्दों पर भारत और रूस की समझ एक-दूसरे से मेल खाती है.प्रधानमंत्री मोदी की ओर से रूसी नागरिकों के लिए मुफ्त ई-टूरिस्ट वीजा की घोषणा आपसी मानव-सम्पर्क को नई दिशा देगी. कुल मिलाकर, यह शिखर सम्मेलन दिखाता है कि पश्चिमी प्रतिबंधों और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बावजूद भारत-रूस ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ न केवल कायम है, बल्कि नए आयामों के साथ आगे बढ़ रही है. आने वाले वर्षों में इस सहयोग का प्रभाव रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और वैश्विक कूटनीति के हर मोर्चे पर स्पष्ट दिखाई देगा.
