सतना: हेलमेट पहने रहने के साथ-साथ यातायात नियमों का पालन करने वाले दोपहिया वाहन चालक ने यदि चौराहे पर लाइन क्रॉस करने की जरा सी भी गलती कर दी तो उसका ऑनलाइन चालान कटने में देर नहीं लगती. लेकिन वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो सारे नियम कायदों को ताक पर रखते हुए सरेआम फर्राटा मारते रहते हैं, लेकिन उनका बाल भी बांका नहीं होता. क्योंकि उन्होंने या तो अपने वाहन की नंबर प्लेट निकाल ली होती है या फिर उसके कुछ अंक अथवा सीरीज को छिपा दिया जाता है. व्यवस्था के इस पहलू के चलते एक ओर जहां असमाजिक तत्वों सहित नियम तोडऩे वालों को हौसले बुलंद हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इससे आम जन के लिए दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ रहा है.
शहर के प्रमुख चौराहों पर सिग्नल सिस्टम स्थापित होने के साथ साथ उसकी मॉनिटरिंग के लिए जिला कलेक्टोरेट परिसर में कंट्रोल एण्ड कमाण्ड सेंटर भी बनाया गया. चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए इस बात की निगरानी की जाने लगी कि रेड लाइट क्रॉस करने वाले वाहनों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई की जाए. नियम तोडऩे वाले वाहनों की पहचान का प्रमुख आधार उसकी नंबर प्लेट को बनाया गया. लेकिन इस व्यवस्था के जोर पकड़ते ही लोगों ने उसका तोड़ निकालना शुरु कर दिया. लिहाजा लोगों ने अपने वाहन की नंबर प्लेट के कुछ अंक अथवा सीरीज को छिपाना शुरु कर दिया.
जिसके चलते चौराहों पर नियम तोडऩे के बावजूद भी वे चालानी कार्रवाई से बचने लगे. नियम तोडऩे वालों को मौज करता देख दूसरे लोग भी प्रभावित होने लगे. नतीजतन नंबर प्लेट से छेड़छाड़ से एक कदम बढ़ते हुए कुछ लोगों ने अपने वाहन की नंबर प्लेट को ही निकालकर घर में रख दिया. आलम यह हो गया कि इन दिनों शहर में हर छठवां दोपहिया वाहन या तो बिना नंबर प्लेट का नजर आता है अथवा आधी अधूरी नंबर प्लेट व्यवस्था को मुंह चिढ़ाती दिखाई देती है. शहर के किसी भी मार्ग अथवा चौराहे से होकर गुजरने वाले वाहनों में यह पैटर्न स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है. इस संबंध में हलांकि यातायात पुलिस द्वारा दावा तो किया जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि नियम-कायदों को खुले आम धत्ता बताने वाले लोग उनकी पकड़ से दूरी ही बनाए रखते हैं.
आमजन के लिए खतरा
एक ओर जहां चौराहे पर रेड लाइट जलते ही आमजन अपना-अपना वाहन रोककर ग्रीन लाइट का इंतजार कर रहे होते हैं. वहीं दूसरी ओर बिना नंबर अथवा आधी-अधूरी नंबर प्लेट वाले वाहन चालक इन सभी को मुंह चिढ़ाते हुए धड़ल्ले से रेड लाइट पार कर निकल जाते हैं. लेकिन इसका सबसे अधिक खतरा तब देखने को मिलता जब दूसरी दिशा के वाहन ग्रीन सिग्रल मिलने पर तेजी से आगे बढ़ रहे होते हैं. इस दौरान कई बार ऐसा होता है कि ग्रीन सिग्रल में जा रहे किसी वाहन चालक की रेड लाइट जंप कर भाग रहे वाहन चालक से टक्कर हो जाती है. इतना ही नहीं बल्कि टक्कर मार कर भागने वाले वाहन की पहचान तक नहीं हो पाती.
असमाजिक तत्वों की चांदी
लूट, छीनाझपटी, चोरी, छेड़छाड़, जानलेवा हमला सहित अन्य कई प्रकार के अपराध को अंजाम देने वाले अक्सर बिना नंबर अथवा आधी अधूरी नंबर प्लेट वाले वाहनों का इस्तेमाल करते देखे जाते हैं. अपराध को अंजाम देने के बाद वे बड़ी ही आसानी से बिना किसी की नजर में आए भाग निकलते हैं. इतना ही नहीं बल्कि प्रतिबंधित साइलेंसर का उपयोग, तेज रफ्तार की हुड़दंग, खतरनाक स्टंट, ड्रंक एण्ड ड्राइव और हिट एण्ड रन जैसे मामलों में भी ये बच निकलते हैं. ये इतने शातिर होते हैं कि प्रमुख चौराहों अथवा मार्गों पर पुलिस-यातायात पुलिस की जांच को धत्ता बताने में इन्हें देर नहीं लगती.
इनका कहना है
बिना नंबर प्लेट अथवा नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ कर वाहन चलाने वाले लोगों को किसी तरह की गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए. वे पुलिस की नजर में हैं और सतर्क हो जाएं अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी. वैसे भी यातायात पुलिस द्वारा औसतन हर रोज आधा दर्जन ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है जिनके वाहन की नंबर प्लेट में छेड़छाड़ पाई जाती है.
संजय खरे, उप पुलिस अधीक्षक, यातायात सतना
