
भोपाल: मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला बड़ा घोटाला सामने आया है। पूर्व मंत्री एवं राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह ने स्वास्थ्य विभाग में हुए 943 करोड़ रुपये के “संगठित और गंभीर” आउटसोर्स पैथोलॉजी घोटाले का खुलासा किया है। उन्होंने इस पूरे मामले की CBI से जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यह राज्य के इतिहास के सबसे बड़े और व्यवस्थित भ्रष्टाचार मामलों में से एक है।
विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में विभाग ने जयवर्धन सिंह को 68,000 पृष्ठों का रिकॉर्ड सौंपा। प्रारंभिक जांच में ही कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो संकेत देते हैं कि 2,019 शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में पैथोलॉजी सेवाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुईं।
सिंह के अनुसार, आउटसोर्सिंग कंपनी साइंस हाउस ने सरकारी रिकॉर्ड में दावा किया है कि वर्ष 2020–21 से 2025 के बीच उसने 12.84 करोड़ पैथोलॉजी जांचें कीं, जबकि प्रदेश की कुल आबादी लगभग 7 करोड़ है। उन्होंने कहा कि जब कई जिलों में मशीनें खराब थीं और वास्तविक जांचें नगण्य थीं, तब इस तरह का आंकड़ा असंभव है। “ये आंकड़े ही घोटाले का पर्दाफाश कर देते हैं,” सिंह ने कहा।
इस अवधि में कंपनी को 943 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। सिंह ने बताया कि एक ही व्यक्ति द्वारा संचालित दो अलग-अलग नामों वाली कंपनियों को काम दिया गया और दोनों में एक ही परीक्षण के लिए अलग-अलग दरें लागू की गईं—कहीं 50 रुपये, तो कहीं उससे कई गुना अधिक—जो स्पष्ट रूप से वित्तीय हेरफेर का संकेत है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी ने स्वास्थ्य सेवाओं पर 0% GST होने के बावजूद 18% GST वसूला, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचा।
सिंह का कहना है कि कई CHC, PHC एवं ब्लॉक अस्पतालों में जांच किए बिना ही फर्जी रिपोर्ट बनाई गईं, जो मरीजों के साथ सीधा धोखा है। उन्होंने कहा कि ED और आयकर विभाग द्वारा कार्रवाई और कंपनी मालिक की गिरफ्तारी के बावजूद राज्य सरकार ने जुलाई 2025 में कंपनी को एक और वर्ष का एक्सटेंशन दे दिया।
भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए सिंह ने कहा कि कांग्रेस पूरे मामले को जनता के सामने रखेगी और निष्पक्ष CBI जांच की मांग जारी रखेगी।
