नई दिल्ली, 03 दिसंबर, 2025: भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में हेरॉन एमके-2 ड्रोन के सफल इस्तेमाल के बाद अपनी रक्षा क्षमताओं में वृद्धि के लिए इजरायल के साथ अतिरिक्त खेप की खरीद के लिए एक करार पर हस्ताक्षर किए हैं। इजरायली रक्षा उद्योग से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, ये सेटेलाइट-लिंक्ड ड्रोन भारतीय थलसेना और वायुसेना के पास पहले से हैं, और अब इन्हें नौसेना में भी शामिल किया जाएगा।
इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के इस हेरॉन एमके-2 ड्रोन की खासियत यह है कि यह मध्यम ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम है। यह 35,000 फुट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है और लगातार 45 घंटे तक हवा में रह सकता है। अधिकारी ने बताया कि IAI का इरादा न केवल इन उन्नत प्रणालियों की आपूर्ति करना है, बल्कि भारत में इन्हें बनाना भी है, जिसमें 60 प्रतिशत से अधिक भारतीय विनिर्माण सामग्री के इस्तेमाल का लक्ष्य शामिल है।
भारत ने हवा में ईंधन भरने वाले छह विमानों की खरीद के लिए मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत निविदा जारी की थी। इस सौदे की दौड़ में केवल आईएआई ही बची है, क्योंकि यह विक्रेता के लिए लगभग 30 प्रतिशत मेड इन इंडिया सामग्री के इस्तेमाल की जरूरत को पूरा कर रही है। सूत्रों के अनुसार, यदि आईएआई के साथ समझौता हुआ तो वह पुराने बोइंग-767 व्यावसायिक विमानों को मॉडिफाई कर उन्हें टैंकर एयरक्राफ्ट में बदल देगी।

