जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने नियमितिकरण से जुड़े एक मामले में पूर्व आदेश का पालन नहीं करने और अवमानना में जवाब पेश न करने को गंभीरता से लिया। जस्टिस डीडी बंसल की एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई पर नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत तौर पर हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिये है। एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई आठ दिसंबर को निर्धारित की है।
दरअसल जबलपुर निवासी राकेश शुक्ला की ओर से अधिवक्ता दीपक सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003-04 में नगर निगम ने 74 दैनिक वेतन भोगियों को नियमित किया था। कुछ शिकायतें मिलने पर पुन: दैवेभो कर दिया। पूर्व में हाईकोर्ट ने इस मामले में विस्तृत आदेश देते हुए कर्मचारियों को नियमित करने के आदेश दिए थे।
न्यायालय ने कहा था कि उन सभी कर्मचारियों के मामलों पर विचार करें जिनका नियमितीकरण किया गया था। इसके साथ ही कहा था कि मृत कर्मचारियों के मामलों पर उनके कानूनी बकाया और उनके बच्चों की अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। जो कर्मचारी पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनके मामलों पर कानून के अनुसार उनके सेवानिवृत्ति बकाया या पेंशन का भुगतान करें।
नगर निगम ने इसके विरुद्ध हाईकोर्ट में अपील पेश की थी। हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर आदेश का पालन करने कहा था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी नगर निगम की विशेष अनुमति याचिका निरस्त कर दी थी। जब आदेश का पालन नहीं हुआ तो याचिकाकर्ताओं ने अवमानना याचिका दायर की। जिसके जवाब में भी लापरवाही बरती गई, जिसे सख्ती से लेते हुए न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
