गीता हमें सिखाती है हम अपने कर्म से नहीं बच सकते

भोपाल। श्रीमद् भागवत गीता में 18 अध्याय हैं। भगवत गीता एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक ग्रंथ है। भगवान श्री कृष्ण ने विश्व समुदाय को कर्म योग के जरिए ही अपने धर्म का पालन करने की प्रेरणा दी है। यह वचन मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के सभागार में गीता महोत्सव कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक बीबी शर्मा ने कहे. यह कार्यक्रम गीता जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया. जिसमें कार्यक्रम संयोजक कुल सचिव डॉक्टर सुशील मंडेरिया भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रो. बी. बी. शर्मा ने कर्म के फल का महत्व को बताते हुए कर्मण्येवाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचना…. श्लोक का वाचन किया। साथ ही प्रो. शर्मा जी ने रामधारी सिंह दिनकर जी की रचना रश्मिरथी का वर्णन करते हुए गीता में वैराग्य और अभ्यास से हम कैसे स्थिर स्थिति को प्राप्त कर सकते हैं. इस विषय पर भी चर्चा की. कार्यक्रम में कुलसचिव डॉक्टर सुशील मंडेरिया ने अपने सम्बोधन में मनुष्य को मानव जीवन कैसे जीना चाहिए, इस पर प्रकाश डाला और सकारात्मक बने रहने को भी कहा. उन्होंने छात्रों को अहंकार से दूर रहने, क्रोध को नियंत्रण में करने और वाणी में संयम रखने की बात कही. साथ ही कहा कि विपरीत से विपरीत परिस्थिति में हम अपना संयम और धैर्य बनाये रखें गीता हमें यही सिखाती है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के स्पेशल बीएड के छात्रों द्वारा कई कार्यक्रमों और भजन की सामूहिक प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के विद्यार्थी सहायता विभाग के निर्देशक प्रो.रतन सूर्यवंशी ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के अधिकारी कर्मचारी और विद्यार्थी गण उपस्थित रहे।

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