इंदौर में 16 वर्षीय युवक गुलशन की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर देशभर में चाइनीज मांझे की समस्या को लेकर गहरी चिंता जता दी है. बायपास के खुले मार्ग पर बाइक से लौटते समय एक अदृश्य, हवा में तैरते हुए मांझे ने उसकी गर्दन चीर दी,एक ऐसी मौत, जो न केवल असमय है बल्कि पूरी तरह टाली जा सकने वाली थी. प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझे की बिक्री, भंडारण और उपयोग का जारी रहना प्रशासनिक ढिलाई का सबसे खतरनाक प्रमाण बन चुका है. चाइनीज मांझा देश में वर्षों से प्रतिबंधित है. इसकी धातु मिश्रित कोटिंग और बेहद तेज़ धार किसी भी मानव शरीर को मिनटों में काट सकती है. सर्वाधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि इस मांझे के चलते हर वर्ष देशभर में सैकड़ों लोग घायल होते हैं और कई मौत के शिकार हो जाते हैं,कभी किसी मासूम की गर्दन कटती है, तो कभी बाइक सवार का चेहरा या आंखें. कई राज्यों ने इस पर सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए, लेकिन परिणाम वही,कागज़ों पर प्रतिबंध, ज़मीन पर खुलेआम बिक्री.इंदौर कलेक्टर द्वारा 25 नवंबर से लागू प्रतिबंध के बावजूद जिस सहजता से यह जानलेवा मांझा बाजारों में उपलब्ध है, वह बताता है कि प्रशासनिक सख्ती केवल घोषणाओं तक सीमित है. यदि बाजारों में ऐसे उत्पाद बिक रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि न तो पर्याप्त निगरानी है, न ही स्थानीय थोक विक्रेताओं पर प्रभावी छापेमारी. गुलशन की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि आने वाले त्योहारों, पवन अनुकूल मौसम और मकर संक्रांति जैसे अवसरों पर यह समस्या और भयावह रूप ले सकती है.चाइनीज मांझा न केवल मानव जीवन के लिए, बल्कि पक्षियों, पशुओं और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है. हर वर्ष हजारों पक्षी पतंग बाज़ी की भीड़ में उलझकर घायल हो जाते हैं. बिजली की तारों से टकराने पर शॉर्ट सर्किट और आग लगने की घटनाएं अलग. यह स्पष्ट है कि यह समस्या केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय है. इंदौर की घटना हो या दिल्ली की सडक़ें, जयपुर के मैदान हों या हैदराबाद की गलियां,जानलेवा मांझा पूरे देश में मौत की लाइन खींच रहा है. इसलिए अब वक्त आ गया है कि सरकारें और पुलिस केवल घोषणाएं न करें, बल्कि ज़मीन पर सुनियोजित, कठोर और निरंतर अभियान चलाएं. यह बिल्कुल उसी तरह का अपराध है, जैसे अवैध हथियार या ड्रग्स बेचना,क्योंकि इसका परिणाम सीधे किसी मासूम की जान पर पड़ता है. केवल दुकानदार पर एफआईआर पर्याप्त नहीं; सप्लाई चेन को तोडऩे, ऑनलाइन बिक्री बंद कराने और थोक व्यापारियों के नेटवर्क पर कार्रवाई की आवश्यकता है. इसके अलावा समाज की भी जिम्मेदारी है. जानलेवा मांझे का इस्तेमाल केवल एक ‘शौक’ या रोमांच नहीं. यह किसी और की जिंदगी पर संकट है. हर नागरिक को जागरूक बनना होगा, हर माता-पिता को अपने बच्चों को समझाना होगा कि ऐसी चीजें मनोरंजन नहीं, अपराध हैं.
गुलशन की मौत एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी से कहीं अधिक है,यह इंदौर ही नहीं, पूरे देश के लिए चेतावनी है.यदि इस बार भी प्रशासन ने आंखें मूंदी रहीं, तो अगली मकर संक्रांति तक कई और मासूमों की गर्दनें इन्हीं धागों से लहुलुहान होंगी. प्रतिबंध तभी सार्थक होगा जब उसकी कड़ाई से, स्थायी और ईमानदार तरीके से पालन किया जाए. वरना हर शहर में चाइनीज मांझा अपनी तेज़ धार से सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता रहेगा, और हम हर बार बस श्रद्धांजलि देकर आगे बढ़ते रहेंगे.
