सीहोर। मंगलवार को वीआईटी कैंपस में छात्रों के हंगामे के बाद प्रबंधन की मनमानी का एक और बड़ा मामला सामने आया है. मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन विभाग के तहत आने वाली नगर परिषद कोठरी द्वारा बार-बार भेजे जा रहे नोटिसों को वीआईटी प्रबंधन लगातार नजर अंदाज कर रहा है. फरवरी 2024 से अक्टूबर 2024 के बीच नामांतरण, बिल्डिंग परमिशन और फायर एनओसी जैसे गंभीर उल्लंघनों के लिए परिषद ने प्रबंधन को छह बार से अधिक सूचना पत्र और अंतिम चेतावनी जारी की है, लेकिन प्रबंधन ने कोई तवज्जो नहीं दी.
कोठरी नगर परिषद के नोटिसों से स्पष्ट होता है कि वीआईटी ट्रस्टी शंकर विश्वनाथन को विभिन्न अनियमितताओं के लिए बार-बार सूचित किया गया, जिसमें फरवरी 2024 से अक्टूबर 2024 के बीच कई बार नोटिस भेजे गए. जैसे 29 फरवरी 2024, 22 मई 2024, 20 जून 2024 एवं 22 जुलाई 2024, इन सभी नोटिसों का उद्देश्य वीआईटी की अचल संपत्तियों के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज जमा करवाना, नामान्तरण कराना और बिना परमीशन बनी इमारतों की बिल्डिंग परमीशन लेना था.
नगर परिषद कोठरी ने 2 अक्टूबर और 9 अक्टूबर 2024 को जारी अपने ‘अंतिम सूचना पत्रोंÓ में साफ कहा है कि किन्तु आपके द्वारा आज तक भवन/भूमि स्वामित्व सम्बन्धी दस्तावेज प्रस्तुत नही किए हैं. अत: आपको अन्तिम रूप से सूचित किया जाता है कि आप अन्दर 3 दिवस में कार्यवाही पूर्ण कराएं अन्यथा आपके विरूद्ध मप्र नपा अधिनियम 1961 की धारा 150/187 के तहत वैधानिक कार्यवाही की जाएगी, लेकिन इसे कॉलेज प्रबंधन की हठधर्मिता ही माना जाएगा कि उसके द्वारा किसी भी नोटिस का जवाब देना जरूरी नहीं समझा गया और न ही खामियों को दूर करने के लिए कोई ठोस प्रयास किए गए. इससे वीआई प्रबंधन की भर्राशाही स्पष्ट नजर आ रही है.
अवैध निर्माण पर हो चुका है 42.40 लाख का जुर्माना
कॉलेज प्रबंधन की इस अनदेखी का सबसे बड़ा परिणाम यह हुआ है कि 11 इमारतों पर फायर एनओसी न लेने के कारण नगर परिषद ने 42 लाख 40 हजार 122 का जुर्माना शुल्क कर दिया है. 2 अक्टूबर 2024 के अंतिम सूचना पत्र में परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि यह राशि जमा नहीं की गई, तो वसूली के लिए संपत्ति की कुर्की की जाएगी. इसके अलावा छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए संस्था की मान्यता निरस्त करने हेतु शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा. बावजूद नगर परिषद कोठरी के इन नोटिसों का वीआईटी प्रबंधन पर कोई असर नहीं हुआ.
जांच कमेटी ने भी मानी कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही
मप्र निजी विवि विनियामक आयोग द्वारा गठित जांच कमेटी ने विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंप दी है. हमीदिया कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल शिवानी, एमवीएम कॉलेज के प्रो. संजय दीक्षित व जीएमसी के प्रो. लोकेंद्र दवे की कमेटी ने जांच में उल्लेख किया है कि पूरा घटनाक्रम प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा है. उन्होंने जांच के दौरान खाना खराब और पानी बदबूदार होने की बात सही पाई. इसी तरह 14 से 24 नवंबर के बीच 35 छात्र बीमार हुए, लेकिन कॉलेज के पास इसका कोई डेटा ही नहीं है. प्रबंधन द्वारा जांच करने पहुंचे सीएमएचओ डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया को गेट पर 2 घंटे रोका गया. इसके अलावा अगर कोई छात्र विरोध करता है तो उसे धमकी दी जाती है. परीक्षा में न बैठाने की धमकी दी जाती थी. कई छात्रों से मारपीट के वीडियो सामने आए. मंगलवार की रात वीआईटी प्रबंधन हालात संभालने में नाकाम रहा. पुलिस देर से बुलाई. तब तक कई जगह तोडफ़ोड़, आगजनी हो चुकी थी.
नहीं मिला नोटिसों का जबाव
वीआईटी प्रबंधन को नोटिस दिए गए हैं, लेकिन नोटिसों का जबाव नहीं मिला, न ही जुर्माना राशि जमा कराई गई है.
नरेन्द्र जाटव,
सीएमओ, नप कोठरी
