
भोपाल: सनातन मिशन ने वरिष्ठ IAS अधिकारी और AJAKS (मध्यप्रदेश एससी-एसटी अधिकारी एवं कर्मचारी संघ) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष संतोष वर्मा द्वारा 23 नवंबर को संगठन के राज्य सम्मेलन में दिए गए विवादित बयान की कड़ी निंदा की है। कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान का एक वीडियो व्यापक रूप से प्रसारित हुआ, जिसमें वर्मा यह कहते हुए सुनाई देते हैं कि जाति आधारित आरक्षण “तब तक जारी रहना चाहिए जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी किसी एससी-एसटी युवक को न दे दे” या तब तक जब तक ऐसा कोई “संबंध” न बन जाए।
मिशन ने कहा कि एक पदस्थ भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी द्वारा सार्वजनिक मंच से ऐसे वक्तव्य देना न केवल सार्वजनिक संवाद की गरिमा में गिरावट है, बल्कि महिलाओं को वस्तु की तरह प्रस्तुत करने का स्पष्ट उदाहरण भी है।
सनातन मिशन के संस्थापक–अध्यक्ष ललित शास्त्री ने कहा, “कन्यादान हिंदू विवाह संस्कार का पवित्र और सांस्कृतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आशीर्वाद, एकता और पारिवारिक सद्भाव का प्रतीक है। इसे आरक्षण से जोड़कर लेन-देन जैसी शर्त में बदलना अत्यंत आपत्तिजनक, सांस्कृतिक रूप से असंवेदनशील और सामाजिक रूप से विभाजनकारी है।
संभावित कानूनी उल्लंघन
मिशन के अनुसार, वर्मा के बयान प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की निम्नलिखित धाराओं के अंतर्गत आते प्रतीत होते हैं:
• धारा 197 – राष्ट्रीय एकता को क्षति पहुँचाने वाले कृत्य
• धारा 353 – विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच वैमनस्य उत्पन्न करना
• धारा 326 – महिलाओं की गरिमा का अपमान, अशोभनीय या अपमानजनक अभिव्यक्ति
मिशन का कहना है कि इन प्रावधानों के तहत अधिकारी के विरुद्ध अभियोजन की संभावना बनती है, जो विधिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन
संगठन ने यह भी कहा कि यह बयान अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों का गंभीर उल्लंघन है, जो अधिकारियों को हर परिस्थिति में मर्यादा, निष्पक्षता, शिष्टाचार और साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए बाध्य करते हैं।
मिशन की माँगें
सनातन मिशन ने अपनी चार प्रमुख माँगें रखी हैं:
1. संतोष वर्मा के विरुद्ध तत्काल विभागीय जांच प्रारंभ की जाए।
2. जांच लंबित रहने तक अधिकारी को निलंबित किया जाए।
3. संबंधित कानूनी धाराओं के तहत संभावित आपराधिक दायित्व की जाँच की जाए।
4. अधिकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दें और जवाबदेही सुनिश्चित करें।
