भोज मुक्त विश्वविद्यालय में संविधान दिवस पर व्याख्यान: समय की कसौटी पर खरा उतरा संविधान

भोपाल। मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में 76वें संविधान दिवस पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ एल पी झारिया ने भारत के संविधान की विशेषताओं और उसकी महत्ता पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो मिलिंद दांडेकर ने की, जबकि कुलसचिव डॉ सुशील मंडेरिया भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर कुलगुरु ने उपस्थित सभी सदस्यों को संविधान की शपथ दिलाई।

डॉ झारिया ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और उसका संविधान दुनिया का सबसे व्यापक लिखित संविधान है। 1946 में गठित संविधान सभा ने विभिन्न देशों के 158 संविधानों का अध्ययन कर भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप संविधान का निर्माण किया। उन्होंने बताया कि संविधान नियमों का ऐसा संग्रह है जो राज्य की कार्यप्रणाली को संचालित करता है। उद्देशिका के महत्व पर उन्होंने विशेष जोर दिया और बताया कि 42वें संशोधन द्वारा समाजवादी पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द जोड़े गए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को संविधान की जानकारी रखना और मौलिक अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो दांडेकर ने कहा कि भारत का संविधान समय की कसौटी पर खरा उतरा है और लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में 26 नवंबर 2008 के आतंकी हमले के पीड़ितों को मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संचालन प्रो रतन सूर्यवंशी ने किया।

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