साक्षी केसरवानी भोपाल। देश के शासन तंत्र, नागरिक अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक ढांचे की आधारशिला एकमात्र संविधान है। प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और अवसरों की गारंटी देता यह संविधान दिवस उन मूल्यों की याद दिलाता है. जिन पर आधुनिक भारत की संरचना खड़ी है। ऐतिहासिक दिन को याद करने और नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला संविधान 2 वर्ष 11 माह 18 दिन की मेहनत के बाद देश का संविधान तैयार किया गया. जो कि 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत कर 26 जनवरी 1950 से लागू किया गया. जिसे आज दुनिया के सबसे विस्तृत लिखित संविधानों में गिना जाता है. संविधान दिवस के अवसर पर नवभारत प्रतिनिधि ने समाज के कुछ प्रतिनिधि से बात की.
स्कूलों में भारतीय संविधान के बोर्ड लगे होते हैं, टेक्स्ट बुक में सामग्री लिखी होती है. लेकिन इस विषय को विद्यार्थियों को और अधिक अच्छे से समझने की जरुरत है. उन्हें संविधान में के शब्दों को गहराई से उसके सही अर्थ के साथ समझने की जरूरत है. साथ ही प्रायोगिक गतिविधियों के जरिये भी संविधान के मूल्य, कर्तव्य और अधिकारों को स्कूलों में समझाया जाना चाहिए। जिससे छात्र अधिक जागरूक और सक्रिय हो सकें।
लोकेश चंद्र जैन, वाइस प्रिंसिपल, सांदीपनी स्कूल, निशातपुरा, भोपाल
न केवल स्कूल की छात्राओं बल्कि समाज के हर वर्ग को हमारे संविधान में लिखे नियमों की विस्तृत जानकरी होनी चाहिए। संविधान में लिखी हर जरुरी जानकारी जो मानवीय मूल्यों को संरेखित करती है. उसे शुरुवात की कक्षा से ही विद्यार्थियों को पढ़ाना चाहिए। समाज के हर वर्ग की जागरूकता के लिए अधिक से अधिक प्रचार प्रयास किया जाना आवश्यक है. जिससे आमजन भी जानकारी के साथ अपने दायित्यों का वहन जिम्मेदारी से करेंगे तो प्रसाशनिक अधिकारियों का भी बोझ कम होगा।
दीप्तिश्रीवास्तव, प्रिंसिपल, नूतन कॉलेज, भोपाल
स्कूल के पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से मौलिक अधिकार और संविधान से जुड़ा एक विषय को जोड़ा जाना चाहिए। इसे बेसिक, एडवांस और हायर एजुकेशन के लेवल पर बांटकर अलग से तैयार करना होगा. जिससे हर उम्र और वर्ग के लोग इसे बेहतर समझें। साथ ही स्कूलों और कालेजों में कुछ एक्टिविटी करवानी चाहिए. जिससे विद्यार्थी अपने अधिकारों का महत्व और कर्तव्यों को जान सकें। किताबी ज्ञान से ऊपर आकर काम करने की जरुरत है. तभी हमारे युवा नये भारत की छवि को बेहतर प्रदर्शित कर पाएंगे।
भूपेंद्र सिंह सिसोदिया, अधिवक्ता, मप्र उच्च न्यायालय
आज की युवा पीढ़ी और विद्यार्थियों के लिए संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों और धाराओं का उदहारण देकर विधयर्थियों को समझने का प्रयास किया जाना चाहिए। इससे उन्हें व्यवहारिक पहलुओं को समझने में आसानी होगी। साथ ही संविधान की कार्यशालाएं आयोजित कर विद्यार्थियों को संविधान के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने का अवसर देना चाहिए। जिससे उनकी रूचि न्यायिक व्यवस्था और संवैधानिक परिदृश्यों पर बढ़ सके.
सुधाकर परासर, प्रिंसिपल, सुभाष एक्सीलेंस स्कूल, भोपाल
