
इंदौर. विशेष न्यायालय इंदौर ने भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए ग्राम पंचायत बड़ीबेकल के सचिव की अनुपातहीन संपत्ति को सरकार के हवाले कर दिया. अदालत ने साफ कहा कि भ्रष्टाचार सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करता है और ऐसी अवैध कमाई पर किसी भी तरह की नरमी संभव नहीं.
अलीराजपुर जिले की ग्राम पंचायत बड़ीबेकल के सचिव हनीफ खान के खिलाफ वर्ष 2014 में दर्ज भ्रष्टाचार प्रकरण में विशेष न्यायालय इंदौर ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया. आरोपी हनीफ खान तथा उनकी पत्नी शबीना खान पर लोकसेवक रहते हुए आय से अधिक चल-अचल संपत्ति अर्जित करने के आरोप में धारा के तहत मामला दर्ज किया था. मध्यप्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम 2011 के प्रावधानों के तहत ईओडब्ल्यू ने लगभग 91.79 लाख रुपए की संदिग्ध संपत्ति राजसात करने का प्रस्ताव 20 जून 2022 को विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया था. सभी दस्तावेजों और जांच रिपोर्टों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाया. न्यायालय ने पाया कि आरोपियों द्वारा अर्जित चल-अचल संपत्तियों का संतोषजनक स्रोत प्रस्तुत नहीं किया जा सका. इस आधार पर कोर्ट ने 71,73,739 रुपए मूल्य की संपत्ति मध्यप्रदेश शासन के पक्ष में राजसात करने के निर्देश दिए. साथ ही जिला कलेक्टर, अलीराजपुर को उक्त संपत्ति का अधिग्रहण कर तत्काल आधिपत्य लेने के आदेश जारी किए. अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि भ्रष्टाचार न केवल प्रशासनिक ढांचे को क्षतिग्रस्त करता है, बल्कि समाज पर भी गंभीर प्रभाव डालता है. ऐसे कार्य कदाचार की श्रेणी में आते हैं और आपराधिक अवचार को जन्म देते हैं. इसलिए अदालत ने आरोपियों के प्रति किसी भी प्रकार की उदारता न बरतते हुए संपत्ति राजसात करने का निर्णय सुनाया.
