सतना: पंडित अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय मेडिकल सतना के छात्रों का आक्रोश सोमवार को उबल पड़ा. जिला चिकित्सालय परिसर में एकत्रित छात्रों ने मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. इतना ही नहीं बल्कि छात्रों द्वारा मांग पत्र भी सौंपा गया.जिले को मेडिकल कॉलेज की उपलब्धि प्राप्त हुए लगभग 3 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद भी यदि वहां पर अध्ययनरत छात्रों को मूलभूत सुविधाओं की मांग के लिए विरोध प्रदर्शन करने की नौबत आ जाए तो फिर जिम्मेदार व्यवस्था पर गंभीर प्रश्र उठना लाजमी है.
हलांकि इसके पहले भी कुछ मेडिकल छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी मांग सामने रखने का प्रयास किया जा चुका है. लेकिन व्यवस्था के जिम्मेदारों के कान में जूं तक नहीं रेंगने के कारण सोमवार को उनका आक्रोश उमड़ पड़ा. सोमवार को जिला चिकित्सालय परिसर में एकत्रित मेडिकल छात्रों ने अचानक ही मुखर होते हुए विरोध प्रदर्शन शुरु कर दिया. हाथो में तख्ती लिए नारेबाजी कर रहे छात्र न सिर्फ खासे आक्रोशित नजर आ रहे थे. बल्कि उनका गुस्सा इस बात को लेकर भी था कि व्यवस्था की अनदेखी के चलते उनका कैरियर दांव में लग रहा है.
चिकित्सालय परिसर में काफी देर तक नारेबाजी करने के बाद मेडिकल छात्र जिला कलेक्टोरेट परिसर में पहुंच गए. जहां पर भी उन्होंने अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. लेकिन इस दौरान छात्रों का गुस्सा उस वक्त कुछ कम हुआ जब एसडीएम द्वारा उनसे चर्चा की गई. चर्चा के दौरान अपनी समस्यायों को सामने रखने के बाद मेडिकल छात्रों ने कलेक्टर के नाम संबोधित मांग पत्र सौंपा. इसी कड़ी में मेडिकल छात्रों ने इस बात की चेतावनी भी दी कि यदि उनकी मांगों को समय रहते पूरा नहीं किया गया तो वे एक बार फिर से बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य हो जाएंगे.
परिवहन सुविधा बड़ी समस्या
मेडिकल छात्रों के अनुसार नेशनल मेडिकल कौंसिल के अनुसार प्रत्येक मेडिकल कॉलेज का अपना अस्पताल होना अनिवार्य है. यदि कॉलेज के पास अस्पताल नहीं है तो फिर छात्रों को मेडिकल कॉलेज-अस्पताल के बीच परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए. अस्पताल परिसर में डेमोंस्ट्रेशन रुम की कमी होने के कारण छात्रों को प्रैक्टिकल शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है. अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं है. अस्पताल परिसर में स्वच्छ और पर्याप्तज वाशरुम उपलब्ध नहीं है. लिहाजा सामान्य स्थिति के साथ-साथ मासिक धर्म के दौरान छात्राओं को वहां पर 3-3 घंटे रहना किसी प्रताडऩा से कम नहीं होता
