
गुना/फतेहगढ़। जिले में रबी सीजन की बोवनी शुरू होते ही किसान खाद की कमी और बिजली संकट से जूझ रहे हैं। इसी बीच बमोरी विधानसभा के फतेहगढ़ सहकारी समिति केंद्र पर खाद वितरण के दौरान बड़ा विवाद हो गया। किसानों ने आरोप लगाया कि समिति में लगभग 500 कट्टे यूरिया खाद का वितरण किया जा रहा था, जिसमें प्रति किसान 4 कट्टे देने का नियम तय था। किसान शांतिपूर्वक अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन इसी दौरान कुछ किसानों ने देखा कि केंद्र प्रभारी संचालक अशोक टुंडे अपने परिचित किसानों को एक ही खाता संख्या पर 20 से 30 कट्टे तक खाद उपलब्ध करा रहे हैं। जब विरोध किया गया तो विवाद बढ़ गया और संचालक ने किसानों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करना शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि गाली-गलौज के साथ-साथ संचालक ने टेबल पर रखे दस्तावेज पटककर वातावरण को और तनावपूर्ण बना दिया।
किसानों ने इस घटना का वीडियो भी बना लिया, जो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वायरल वीडियो में संचालक को जिला कलेक्टर के प्रति भी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए बताया जा रहा है। घटना के बाद क्षेत्र में व्यापक रोष फैल गया। विवाद शांत होने के बाद किसान थाने पहुंचे और संचालक के खिलाफ अभद्रता, धमकी और खाद वितरण में अनियमितता की शिकायत दर्ज कराई। किसानों का कहना है कि बोवनी के समय उन्हें खाद की सख्त जरूरत है, लेकिन विभागीय कर्मचारी उनकी समस्याओं को समझने के बजाय उन्हें अपमानित कर रहे हैं।
घटना पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुना प्रवास के दौरान कहा कि यह मामला सरकार के होम डिलीवरी ऑफ फर्टिलाइजर जैसे दावों की सच्चाई सामने लाता है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार दो जिलों को मॉडल बताते हुए घर-घर खाद पहुंचाने की बात करती है, दूसरी ओर उन्हीं की नियुक्ति वाले कर्मचारी किसानों को गालियां दे रहे हैं, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। पटवारी ने आरोप लगाया कि अब तक संचालक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जो सरकार की मौन सहमति को दर्शाता है।
फतेहगढ़ क्षेत्र के किसानों का कहना है कि खाद वितरण में अनियमितता खुलेआम हो रही है और प्रशासन इस पर आंखें मूंदे बैठा है। उनका कहना है कि समय पर खाद न मिलने से फसल पर असर पड़ेगा। किसानों ने जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई, खाद वितरण की निष्पक्ष जांच और पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मांग की है। सुनील ओझा सहित अन्य किसानों का आरोप है कि संचालक नियम बताकर 4 कट्टे दे रहे थे, परंतु बीच-बीच में अपने परिचितों को 20 से अधिक कट्टे दिए जा रहे थे। वहीं किसान कल्याण सिंह बघेल ने बताया कि जब सभी ने इस मनमानी पर विरोध किया तो संचालक किसानों और जिला कलेक्टर के प्रति अभद्र भाषा का उपयोग करने लगे। पूरी घटना से क्षेत्र में असंतोष व्याप्त है और किसान प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
