विशेषज्ञों संग संवाद में निखरी बाल वैज्ञानिकों की सोच

भोपाल। राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी के चौथे दिन क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में सुबह का पहला सत्र विद्यार्थियों के लिए बेहद रोचक साबित हुआ। मंच पर जब भारत सरकार के पेटेंट और डिजाइन विभाग के सहायक नियंत्रक प्रोफेसर नीलेश पटेल पहुंचे तो बच्चों की उत्सुकता और बढ़ गई। उन्होंने सरल उदाहरणों के माध्यम से बौद्धिक संपदा का महत्व समझाया। पेटेंट कैसे मिलता है कौन से दस्तावेज जरूरी होते हैं और भविष्य में यह क्यों उपयोगी है इन सवालों पर बच्चों ने बेझिझक प्रश्न पूछे और उन्होंने धैर्यपूर्वक हर जिज्ञासा का समाधान किया।दूसरे सत्र में मप्र पुलिस के अधिकारी नीरज सहाय और मैनिट भोपाल के वैज्ञानिक प्रोफेसर विलास वरुड़कर से छात्रों का सीधा संवाद देखने लायक था। नीरज सहाय ने कहा कि विज्ञान केवल पढ़ने का विषय नहीं बल्कि जीवन को देखने का नजरिया देता है। उन्होंने बच्चों को हर चीज में क्यों पूछने की आदत विकसित करने की सलाह दी। प्रोफेसर वरुड़कर का सत्र बच्चों के लिए बेहद प्रेरक रहा। उन्होंने कहा कि प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के भीतर सबसे अधिक रचनात्मकता होती है और ऐसे मंच उन्हें अपने भीतर के वैज्ञानिक को पहचानने का मौका देते हैं। जलवायु संकट पर पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को भविष्य का महत्वपूर्ण रास्ता बताया। अंत में एसीपी चंद्रशेखर पांडे ने मुस्कान अभियान के अनुभव साझा किए और बच्चों को सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने की सीख दी। पूरे दिन बच्चों की उत्सुकता और उत्साह परिसर में महसूस किया जा सकता था।

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