अमरूद की फसल नीलामी न होने से बर्बादी की कगार पर

सांची: ऐतिहासिक नगरी सांची में स्थित लगभग छह एकड़ क्षेत्रफल वाला शासकीय उद्यान इन दिनों विभागीय लापरवाही का शिकार है. वर्षों पहले 12 एकड़ में विकसित इस उद्यान का बड़ा हिस्सा पर्यटन विभाग को सौंपे जाने के बाद अब शेष भूमि पर फलदार वृक्ष एवं विभिन्न प्रजातियों के पौधों का उत्पादन किया जाता है. आम, अमरूद, आंवला सहित इन फलदार वृक्षों से हर वर्ष अच्छी-खासी आय होती है, साथ ही किसानों को पौधों का विक्रय होता है.

परंतु इन दिनों अमरूद की तैयार खड़ी फसल नीलामी न होने के कारण तेजी से बर्बाद हो रही है.अमरूद बड़ी मात्रा में झड़ने लगे हैं, जबकि नीलामी में भाग लेने वाले लोग लंबे समय से प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं.नीलामी में भाग लेने वाले व्यापारियों के अनुसार नीलामी समय पर न होने के कारण हर वर्ष फल की क्षति होती है और विभाग की आय में कमी आती है, साथ ही नीलामी में भाग लेने वालों को भी पूरा लाभ नहीं मिल पाता.

नीलामी देर से होने पर फसल की गुणवत्ता गिर जाने संबंध में उप संचालक उद्यान आर.एस. शर्मा ने बताया कि उद्यान से मिली जानकारी के आधार पर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और शीघ्र ही अमरूद की नीलामी करवाई जाएगी. उनका कहना है कि विभाग नीलामी तभी शुरू करता है, जब उद्यान से औपचारिक सूचना प्राप्त होती है. स्थिति यह स्पष्ट करती है कि जिम्मेदार अधिकारियों की ढिलाई न केवल फसल को उजड़ने की कगार पर ले आई है, बल्कि विभागीय आय पर भी बड़ा प्रहार कर रही है.

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