शिक्षकों की ई-अटेंडेंस को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई, एक सप्ताह में सरकार से जवाब मांगा

जबलपुर: मध्यप्रदेश में शिक्षकों की अनिवार्य ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर दायर याचिकाओं पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता शिक्षकों की ओर से शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब पेश किया गया, जिसमें ई-अटेंडेंस लागू होने से उत्पन्न हो रही व्यावहारिक परेशानियों को अदालत के सामने रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया कि कई ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में नेटवर्क की कमी के कारण शिक्षक समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाते।

इसके कारण कई बार उपस्थिति गलत दिखाई देती है या अनुपस्थित मानी जाती है, जिससे शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव और प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। शिक्षकों की ओर से यह भी कहा गया कि सुबह निर्धारित समय में स्कूल पहुंचने से पहले ई-अटेंडेंस दर्ज करने की बाध्यता कई बार असंभव स्थिति उत्पन्न करती है, विशेषकर दूर-दराज के स्कूलों में तैनात शिक्षकों के लिए।
राज्य सरकार ने मांगी मोहलत
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत से जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा गया। अदालत ने सरकार की मांग स्वीकार करते हुए एक सप्ताह में विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को यह बताना होगा कि ई-अटेंडेंस सिस्टम को लेकर शिक्षकों की जिन समस्याओं का उल्लेख किया गया है, उन पर विभाग का क्या रुख है और किन सुधारात्मक कदमों की योजना है।

अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष और याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों की तुलना कर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है। शिक्षकों के एक वर्ग ने इसे बड़ी राहत बताते हुए कहा कि अदालत में उनके मुद्दों को गंभीरता से सुना गया है और उम्मीद है कि ई-अटेंडेंस प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन अथवा लचीलापन लाया जाएगा।

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