SIR सर्वे: बीएलओ और सचिव की धमकियों से नाराज आशा-ऊषा कार्यकर्ता धरने पर बैठीं

गुना। आशा ऊषा आशा सहयोगी संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश के आह्वान पर सोमवार को जिले में आशा एवं आशा पर्यवेक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक दिवसीय हड़ताल कर शास्त्री पार्क, जिला अस्पताल के सामने धरना दिया। हड़ताल का मुख्य कारण प्रोत्साहन राशि का भुगतान न होना, एसआईआर सर्वेक्षण में जबरन कार्य कराने का दबाव और कई महीनों से बकाया वेतन भुगतान है, जिससे प्रदेशभर की आशा कार्यकर्ताओं में आक्रोश बढ़ गया है। जिलाध्यक्ष मिथलेश गोस्वामी ने बताया कि बीएलओ और पंचायत सचिवों द्वारा आशा कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाया जा रहा है कि यदि वे एसआईआर सर्वेक्षण नहीं करेंगी तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आशाओं को रात में प्रसूताओं की डिलेवरी करानी पड़ती है और सुबह उन्हें सर्वेक्षण के लिए भेज दिया जाता है, जो पूरी तरह अनुचित और अमानवीय है, क्या उनका परिवार नहीं? लगातार बढ़ते कार्यभार और भुगतान न मिलने से प्रदेश की आशा-ऊषा कार्यकर्ता गंभीर आर्थिक संकट में हैं।

मोर्चा ने बताया कि प्रदेशभर में कई जिलों में तीन-तीन महीनों से वेतन और प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है। दशहरा और दीपावली जैसे त्यौहारों पर भी भुगतान नहीं होने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया। जबकि अन्य विभागों में कर्मचारियों को त्यौहार से पहले पूरा वेतन और भत्ते दिए जाते हैं।

यह हैं प्रमुख मांगें

धरने में आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं ने मांग रखी की आशा एवं पर्यवेक्षकों के वेतन और प्रोत्साहन राशि के सभी बकाया का तत्काल भुगतान, केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाई गई राशि का एरियर सहित जल्द भुगतान, 3. हर माह की 5 तारीख तक वेतन और प्रोत्साहन राशि का नियमित भुगतान सुनिश्चित हो। वहीं हर भुगतान की पर्ची जारी करना, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों का तत्काल निराकरण नहीं किया गया, तो 17 नवंबर को प्रदेशभर में 24 घंटे का बड़ा आंदोलन किया जाएगा और जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। धरने में बड़ी संख्या में आशा, ऊषा और सहयोगी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और सरकार से तत्काल समाधान की मांग की।

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