
ग्वालियर। बदलते मौसम, घटती उपज और बढ़ती लागत के बीच खेती को लाभकारी बनाने के लिए अब वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक अनुसंधान पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में कृषि विज्ञान केन्द्र, ग्वालियर में आयोजित 45वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में विशेषज्ञों ने किसानों के हित में नई कार्ययोजनाओं और तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में धान की सीधी बोनी, लेजर लेवलिंग, जैव उर्वरकों के उपयोग और उन्नत सब्जी प्रजातियों को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।
कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित बैठक में कृषि विभाग, कृषि अभियांत्रिकी, कृभको, इफको, एमपी एग्रो, आत्मा, एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों तथा प्रगतिशील किसानों सहित कुल 28 प्रतिभागियों ने भाग लिया। मुरैना, दतिया, शिवपुरी एवं लहार के कृषि विज्ञान केंद्रों से वैज्ञानिक ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं केंद्र प्रमुख डॉ. शैलेन्द्र सिंह कुशवाह ने अतिथियों का स्वागत किया।
बैठक की अध्यक्षता निदेशक विस्तार सेवाएं एवं अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय ग्वालियर डॉ. वाय.पी. सिंह ने की। मुख्य अतिथि के प्रतिनिधि के रूप में अटारी जोन-9 जबलपुर के वैज्ञानिक डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ऑनलाइन शामिल हुए। केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. अमिता शर्मा ने रबी 2025-26 की गतिविधियों और खरीफ 2026 की प्रस्तावित कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
बैठक में डॉ. वाय.पी. सिंह ने धान की सीधी बोनी और लेजर लेवलिंग पर प्रक्षेत्र परीक्षण कराने का सुझाव दिया। वहीं डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने एकीकृत कीट प्रबंधन के परीक्षणों में कीट-पतंगों के नाम शामिल करने तथा भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान की उन्नत प्रजातियों को अपनाने पर जोर दिया। कृभको के प्रतिनिधि अभिषेक मोदी ने माइकोराजा और जैव उर्वरकों पर अध्ययन बढ़ाने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रश्मि बाजपेयी ने तथा आभार डॉ. राजीव सिंह चौहान ने व्यक्त किया।
