इंदौर: पलासिया स्थित कोरल अस्पताल में एक प्री–मैच्योर नवजात की मौत को लेकर परिजनों ने गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. परिवार का कहना है कि इलाज में गलती के कारण बच्चे की जान चली गई, लेकिन डॉक्टरों ने मौत के बाद भी उसे वेंटिलेटर पर रखा और लगातार बिल बढ़ाते रहे.मामला महू निवासी श्रद्धा और मोनू कौशल के परिवार से जुड़ा है.
गर्भावस्था के सातवें महीने में श्रद्धा की हार्टबीट अनियमित होने पर 23 अक्टूबर को महू के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने समय से पहले डिलीवरी कराने की सलाह दी. डिलीवरी के बाद बच्चे की हालत नाजुक बताई गई और उसे तत्काल इंदौर के कोरल अस्पताल रेफर किया गया. अस्पताल पहुंचने पर नवजात को एनआईसीयू में रखा गया, लेकिन उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई. परिजनों का आरोप है कि इलाज संभाल रहे डॉक्टर ने दवाइयों की गलत मात्रा दी, जिससे बच्चे की हालत और खराब हुई.
मकान तक बेच दिया
परिवार का कहना है कि बच्चे के निधन की पुष्टि होने के बाद भी उन्हें वेंटिलेटर पर रखने की बात कहकर दिखाया जाता रहा. परिजन बताते हैं कि बच्चे को बचाने की कोशिश में उन्होंने 6.50 लाख रुपए में अपना मकान तक बेच दिया, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें वास्तविक स्थिति से अनजान रखा. परिवार अब पूरे मामले की जांच और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है.
