जीएसटी सुधारों के बाद कृत्रिम धागों से मिलेगी कपड़ा उद्योग को गति

नयी दिल्ली, 16 नवंबर (वार्ता) वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत नयी पीढ़ी के सुधारों में कपास और कृत्रिम धागों (एमएमएफ) पर कर की दर एक समान पांच प्रतिशत कर दी गयी है जिससे कपड़ा उद्योग की रफ्तार और बढ़ने की उम्मीद है।

कपड़ा उद्योग पारंपरिक रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के सकल घरेलू उत्पाद में कपड़ा एवं वस्त्र उद्योग का योगदान 2.3 प्रतिशत रहा। कुल औद्योगिक उत्पादन में इसका योगदान 13 प्रतिशत और निर्यात में 12 प्रतिशत है।

भारत कपड़े और वस्त्रों का दुनिया में छठा सबसे बड़ा निर्यातक है। वित्त वर्ष 2023-24 में 34.4 अरब डॉलर का कपड़ा (तैयार वस्त्र और अन्य उत्पाद समेत) निर्यात किया गया था और इस क्षेत्र के वैश्विक व्यापार में देश की हिस्सेदारी 3.91 प्रतिशत है। कृषि के बाद यह सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है। इसमें 4.5 करोड़ लोग सीधे काम करते हैं।

कपास उगाने में पानी की काफी खपत के कारण यह अधिक महंगा होता है। यही कारण है कि दुनिया में अब कृत्रिम धागे ही ज्यादा इस्तेमाल किये जाते हैं। जीएसटी के तहत सितंबर तक कपास पर पांच प्रतिशत और एमएमएफ पर 18 प्रतिशत कर लग रहा था। कारण देश में एमएमएफ का इस्तेमाल अब भी कपास से पीछे है। गत 22 सितंबर से लागू अगली पीढ़ी के सुधारों में अब कपास और एमएमएफ दोनों पर बराबर कर लगाया जा रहा है।

डोढिया समूह के निदेशक भद्रेश डोढिया ने बताया कि जीएसटी सुधारों के बाद अब एमएमएफ को कॉटन से बेमेल प्रतिस्पर्धा नहीं करनी होगी। इससे कीमतें कम होंगी और निर्यात में भारती उत्पाद प्रतिस्पर्धी बनेंगे तथा घरेलू बिक्री बढ़ेगी।

कॉटन और कृत्रिम धागों की तुलना पर उन्होंने कहा, ”यह सही है कि कपास का स्पर्श, संवदेन और वह जिस तरह से शरीर तक हवा पहुंचने देता है, किसी और कपड़े के लिए उसकी जगह लेना आसान नहीं होगा। लेकिन आज कपड़ा उद्योग सिर्फ परिधान तक सीमित नहीं है। कई तरह के तकनीकी रुप से विकसित टेक्सटाइल हैं जो कृत्रिम धागों से ही बनते हैं क्योंकि उसमें विविधता ज्यादा मिलती है। ”

श्री डोढ़िया ने कहा कि वैश्विक बाजार पहले ही एमएमएफ की तरफ बढ़ चुका है। कपास की अपनी मांग स्थिर बनी रहेगी, लेकिन आने वाले समय में उद्योग की वृद्धि एमएमएफ से ही आयेगी।

उल्लेखनीय है कि वैश्विक स्तर पर कपड़ा बाजार में एमएमएफ की हिस्सेदारी 73 प्रतिशत है जबकि भारत में यह 43 प्रतिशत है। सरकार ने एमएमएफ को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई), राष्ट्रीय टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन और पीएम मित्रा प्रमुख हैं।

 

 

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