साइबर अपराधियों के निशाने पर वरिष्ठ नागरिक, डिजिटल सुरक्षा कौशल सीखने की ज़रूरत

भुवनेश्वर, 16 नवंबर (वार्ता) वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी में तेज़ी से हो रही वृद्धि के बीच सिल्वर एज फ़ाउंडेशन फ़ॉर एल्डर्स ने रविवार को भुवनेश्वर में बुजुर्गों के लिए साइबर सुरक्षा पर एक मास्टरक्लास का आयोजन किया। इस सत्र में भुवनेश्वर के विभिन्न हिस्सों से 120 से ज़्यादा वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के अनुसार 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिदिन 7,000 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गये और वरिष्ठ नागरिक साइबर अपराधियों के प्रमुख निशाने पर रहे।

उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में कहा है कि धोखेबाजों ने ‘डिजिटल गिरफ्तारियों’ के ज़रिए पीड़ितों से, 3,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की ठगी की है। इनमें से ज़्यादातर बुजुर्ग थे जिन्हें इन ठगों ने अपना निशाना कर धनराशि वसूली थी।

जून 2025 में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक ऑनलाइन मास्टरक्लास के बाद यह दूसरी मास्टरक्लास है। यह कार्यक्रम सिल्वर एज फ़ाउंडेशन के टेक फॉर एल्डर्स कार्यक्रम का एक हिस्सा है जिसका उद्देश्य स्मार्ट बुजुर्ग तैयार करना है।

ओडिशा स्थित आईटी कंपनी सीएसएम टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, सीएसआर कार्यक्रम के तहत सहायता प्रदान कर रही है। सीएसएम टेक्नोलॉजी की निदेशक सुश्री लग्ना पांडा ने कहा, “हमारा सहयोग डिजिटल समावेशन की दिशा में है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमारे माता-पिता और बुजुर्ग तकनीक के लाभों से वंचित न रहे।

इस पहल का उद्देश्य बुजुर्गों को फ़िशिंग कॉल, यूपीआई स्कैम, पहचान की चोरी और फर्जी ग्राहक सेवा धोखाधड़ी जैसे साइबर खतरों की पहचान करने में मदद करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड महामारी के बाद जो बुजुर्ग डिजिटल सेवाओं पर अधिक निर्भर हैं, उन्हें उभरते ऑनलाइन जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है।

ओडिशा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक और इंडिया केयर्स वालंटियर्स के संस्थापक अरुण बोथरा ने भाग लेने वाले बुजुर्गों को डिजिटल सुरक्षा उपायों और विधियों के बारे में शिक्षित किया। सिल्वर एज फाउंडेशन की पहल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “जागरूकता सबसे मजबूत बचाव है।” एक सतर्क बुजुर्ग पूरे परिवार को साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने से बचा सकता है।

इस सत्र के मास्टर-ट्रेनर, मनीलाइफ फाउंडेशन, मुंबई के उप-संपादक, योगेश सपकाले ने सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया कि कैसे धोखेबाजों की पहचान की जा सकती है और वे विभिन्न तकनीकों का उपयोग कैसे करते हैं।सुश्री सुचेता दलाल द्वारा स्थापित मनीलाइफ फाउंडेशन वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल सुरक्षा पर काम करता है। श्री सपकाले साइबर धोखाधड़ी के भारत के अग्रणी विशेषज्ञों में से एक हैं और धोखेबाजों द्वारा अपनाई गई तकनीक और तकनीकों पर अपने कॉलम के लिए जाने जाते हैं।

 

 

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