
इंदौर। राज्य को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का पसंदीदा ठिकाना बनाने की दिशा में आज इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 के तहत “जीसीसी लीडरशिप कनेक्ट राउंडटेबल” आयोजित किया गया। इसमें 25 से अधिक प्रमुख जीसीसी प्रतिनिधियों ने भाग लेकर मध्यप्रदेश की टेक्नोलॉजी पॉलिसी और निवेश संभावनाओं पर मंथन किया।
इस दौरान अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संजय दुबे ने कहा कि राज्य सरकार जीसीसी को बढ़ावा देने के लिए समर्पित नीति पर काम कर रही है। टियर-2 शहरों की सुविधाएं और कुशल मानव संसाधन जीसीसी के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां जीसीसी नीति लागू की गई है। साथ ही ड्रोन डाटा रिपॉजिटरी, डाटा सेंटर सब्सिडी, और स्पेस टेक्नोलॉजी नीति जैसे कदम राज्य को तकनीकी रूप से मजबूत बना रहे हैं।
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी मध्यप्रदेश की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। वेना इंडिया के गौतम यादव ने कहा कि आईआईटी इंदौर, भोपाल और जीएसआईटीएस जैसे संस्थानों से राज्य को उत्कृष्ट टैलेंट मिलता है। केपीएमजी के गौरव कुमार ने कहा कि यहां के युवा अपने राज्य में रहकर काम करना पसंद करते हैं, जिससे टैलेंट रिटेंशन आसान होता है। एनटीटी डाटा के क्षितिज बंथिया ने स्थानीय भर्ती और स्टार्टअप कल्चर को प्रोत्साहन की आवश्यकता बताई।
राज्य सरकार द्वारा आसान रजिस्ट्री, लेबर लॉ सरलीकरण, पेरोल सब्सिडी और पेटेंट असिस्टेंस जैसी सुविधाएं देने से निवेश माहौल और भी मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों ने माना कि जीसीसी का विस्तार न केवल तकनीकी और औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और नवाचार के नए अवसर भी खोलेगा।
