
नई दिल्ली। पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर को तीनों सेनाओं का प्रमुख बनाने के लिए संविधान में बदलाव कर रहा है। अब उन्हें देश का पहला सीडीएफ (चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज) बनाया जाएगा। यह भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की तरह होगा। नया पद इसलिए बनाया गया है ताकि सेना, नौसेना और वायुसेना आपस में मिलकर बेहतर तरीके से काम कर सकें और तीनों की कमान एक जगह से संभाली जा सके। दरअसल, आसिम मुनीर के लिए 27वें संशोधन के तहत सीडीएफ पद बनाया जा रहा है, जो तीनों सेनाओं से ऊपर होगा। यह सेना प्रमुख खुद मुनीर के पास ही रहेगा।
हाथ में होगा परमाणु बटन
बताया जा रहा है कि सीडीएफ के रूप में उन्हें ‘नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड’ के प्रमुख की नियुक्ति का अधिकार भी मिलेगा। संशोधन के अनुसार प्रधानमंत्री यह नियुक्ति सीडीएफ की सलाह पर करेंगे। साफ है, पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर पूर्ण नियंत्रण मुनीर के हाथों में आ जाएगा। पिछले सेना अध्यक्षों से कहीं आगे मुनीर ने एक तरह से सारी सैन्य शक्तियां अपने पास रख ली हैं।
न्यायपालिका को तोड़ा
असल में मुनीर सब कुछ एक कमजोर शहबाज शरीफ सरकार के सहारे कर रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई चीफ इमरान खान के जेल में होने के कारण किसी संगठित राजनीतिक विरोध की संभावना नहीं है। उन्होंने ठीक उसका उलटा किया है जो हमूदुर रहमान आयोग ने सुझाया था। खबर है, मुनीर ने ‘फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट’ बनाकर न्यायपालिका को भी बांट दिया है। इससे पाकिस्तान में अब दो मुख्य न्यायाधीश होंगे, लेकिन यह साफ नहीं है कि पाकिस्तान का वास्तविक ‘मुख्य न्यायाधीश’ किसे कहा जाएगा।
विशेष अधिकारों से बनेंगे सुप्रीमो
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी (पीपीपी) को साधने के लिए संशोधन में यह भी जोड़ा गया है कि राष्ट्रपति को अब आजीवन कानूनी छूट मिलेगी, जबकि पहले यह केवल कार्यकाल तक सीमित थी। इसी अनुच्छेद में यह भी जोड़ा गया है कि फील्ड मार्शल (जो कि आसिम मुनीर हैं) को भी आजीवन वही विशेषाधिकार मिलेगा, जो राष्ट्रपति को मिलती है। फील्ड मार्शल को हटाने की प्रक्रिया भी राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया जैसी होगी। यह एक ऐसी राजनीतिक सरकार के जरिए हो रहा है जो पूरी तरह सेना पर निर्भर है।
भारतीय सीमा पर रहेगी नजर
पाकिस्तान में हो रहे इस संविधान संशोधन के बीच भारत को अपनी चौकसी बढ़ाने की जरूरत है। पाकिस्तान के इतिहास में हर शक्तिशाली सैन्य प्रमुख की तरह, मुनीर भी अमेरिका और चीन दोनों से समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं। माना जा रहा है कि वो अमेरिका विशेषकर ट्रंप प्रशासन, से पूर्ण समर्थन की आस लगाए बैठे हैं। इस्लामी कट्टरपंथी वर्ग भले इससे नाराज हो, लेकिन यही मुनीर की भविष्य की रणनीति का केंद्र है। ऐसे में भारत को पड़ोस में हो रहे इस घटनाक्रम के साथ ही सीमाओं पर सतर्कता बरतनी होगी।
