सैकड़ो जर्जर स्कूल भवनों को मरम्मत की दरकार, 77 शालाएं पूरी तरह जीर्णशीर्ण

ब्यावरा: पढ़ाई के स्तर को बेहतर से बेहतर बनाने शासन द्वारा लाखों, करोड़ों रुपये खर्च कर बच्चों को शासकीय स्कूलों में अच्छी से अच्छी पढ़ाई की सुविधा देने के प्रयास किए जा रहे है वहीं जिले में ही दर्जनों की संख्या में ऐसे शासकीय शाला भवन है जिनको मरम्मत का इंतजार है. ऐसे ही जर्जर भवनों में जोखिम उठाकर नौनिहाल पढ़ाई करने को मजबूर है या फिर वहां से स्कूल को अन्य जगह दूसरे भवन में शिफ्ट कर दिया गया है. जिले की 393 प्राथमिक शालाओं की मरम्मत हेतु जिले से प्रस्ताव वरिष्ठ कार्यालय को गया है परन्तु आज दिनांक तक इनकी मरम्मत की स्वीकृति नहीं मिल सकी है. सैकड़ो जीर्णशीर्ण शासकीय शाला भवनों को अपनी मरम्मत किए जाने की दरकार है.
गौरतलब है कि बारिश में ऐसे जर्जर भवनों को चिन्हित कर वहां से स्कूल खाली कर अन्य सुरक्षित भवनों में शिफ्ट कर संचालित किए गये. जिला शिक्षा विभाग द्वारा ऐसे जर्जर भवनों की मरम्मत हेतु स्टीमेट तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय को भेजा गया. परन्तु आज दिनांक तक इनकी मरम्मत की स्वीकृति नहीं हो सकी है.
यहां मरम्मत की दरकार
जिले भर में करीब 393 प्राथमिक शालाओं को मरम्मत की जरुरत है. किंतु कई ऐसे शाला भवन है जिनको मरम्मत की जल्द से जल्द दरकार है. ब्यावरा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय अमरपुरा, प्रावि जामन का पूरा, प्रावि बरखेड़ी (अमरगढ़), प्रावि सारस्याबे, प्रावि कादियाखेड़ी सहित दर्जनों शाला भवन ऐसे है जहां जल्द मरम्मत किए जाने की आवश्यकता है.
भवनों की मरम्मत आवश्यक
जर्जर भवनों की मरम्मत होना सुरक्षात्मक दृष्टि से अति आवश्यक है. उल्लेखनीय है कि पूर्व में कुछ जर्जर भवनों की छत से प्लास्टर भरभराकर नीचे आ गिरा था. इस तरह की घटनाओं के कारण एक डर सा बना रहता है.
चिंतित करने वाले हालात
नौनिहाल ऐसे जर्जर भवनों में पढ़ाई करने जाते है तो हर समय एक चिंता बनी रहती है. कई जीर्णशीर्ण भवनों की छत, दीवारों पर बरसाती, तिरपाल ढंके हुए देखे जा सकते है. परन्तु तेज आंधी, बारिश में डर बना रहता है. हालांकि कई अति जर्जर भवनों को खाली कर अन्यत्र जगह कक्षाएं संचालित की जा रही है.
12 शालाएं अन्यत्र शिफ्ट
ब्यावरा विकासखण्ड की 12 ऐसी शालाएं जिनके भवन बहुत ही अधिक दयनीय स्थिति में होने से शिक्षा विभाग द्वारा बारिश के मौसम में इन शालाओं को अन्य जगह घर, दालान व हॉल में शिफ्ट कर दिया गया है ताकि भविष्य में किसी प्रकार का कोई खतरा न हो.
ग्रामीणों ने सहर्ष दी जगह
सुरक्षा की दृष्टि से ऐसी जर्जर शालाओं को अन्य जगह शिफ्ट करने हेतु घर, दालान या हॉल में बच्चों की पढ़ाई के लिए ग्रामीणजनों द्वारा सहर्ष जगह दे दी गई जहां वर्तमान में शालाएं संचालित की जा रही है.
स्वीकृति का इंतजार
जिला शिक्षा विभाग के अनुसार जिले भर से कक्षा 1 से 8 वीं तक की 393 प्राथमिक शालाओं की मरम्मत हेतु प्रस्ताव भेजे गये है. स्वीकृति होने पर संबंधित शाला प्रबंधन इन भवनों की मरम्मत करा सकेंगे

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