रीवा: कृष्णा राजकपूर सभागार रीवा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के 17वें अधिवेशन का आज दूसरा दिन था. जिसमें देश के कई बड़े साहित्यकार और पर्यावरण प्रेमी, कला और पत्रकारिता जगत के लोग उपस्थित रहे.कार्यक्रम को चार सत्रों में विभाजित किया गया था. पहले सत्र की शुरुआत कुमुद शर्मा ने वैदिक साहित्य परंपरा से साहित्यकारों पर दिशा के बारे में बात करते हुए बताया कि भारतीय साहित्य में वैदिक काल की बहुत प्रभुक्ता रही है.
हमने वेद और वेदांशो से लिए हुए ज्ञान को साहित्य के द्वारा जनमानस तक पहुंचाया है. उसके बाद आशीष कुमार गुप्ता ने कुटुंब प्रबोधन पर बात करते हुए कहा कि भारत की संस्कृति, सभ्यता और त्योहार कुटुंब की वजह से बचा है. आज के युवा कुटुंब से परिवार, परिवार से हम, और हम से मै हो चुके है. जब की हमारी भारतीय संस्कृति मे 24 घंटे में 8 घंटे सोने, 8 घंटे काम करने और बाकी का व$क्त परिवार और समाज का होता है.
पर आज की पीढ़ी सिर्फ काम मे लगी रहती है और उससे कुटुंब से कोई मतलब नहीं रह गया है और यही कारण है कि आज के युवा कम उम्र मे ही मानषिक तनाव का शिकार हो रही है. दूसरा सत्र डॉ करीना सक्सेना ने गीत से शुरू किया. दूसरे सत्र के पहले वक्ता पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने अपने वक्तव्य मे पर्यावरण और जल संरक्षण के बारे में बात करते हुए बताया कि भारत मे ही नि बल्कि पूरी दुनिया में जल का संकट है. उन्हों ने बताया कि पानी बनाया नहीं सिर्फ बचाया जा सकता है. तृतीय सत्र में अमित कुशवाहा स्व जागरण से राष्ट्र जागरण विषय पर विचार रखे वही पद्मश्री जगदीश जोशीला ने निमाड़ी भाषा के लिए किये गये कार्यो पर प्रकाश डाला.
