संभावित दो स्तरीय डब्ल्यूटीसी ने बढ़ाई वेस्टइंडीज क्रिकेट की चिंता

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (वार्ता)अगरआईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) के लिए दो स्तरीय प्रणाली (टू टियर सिस्टम) तय करती है तो वेस्टइंडीज शीर्ष स्तर की टीमों से बाहर हो सकती है क्योंकि डब्ल्यूटीसी के तीनों संस्करण में वेस्टइंडीज नौ टीमों में आठवें स्थान पर रही थी और मौजूदा डब्ल्यूटीसी चक्र में भी वेस्टइंडीज को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीनों टेस्ट में हार मिली है। टू टियर सिस्टम की संभावना से वेस्टइंडीज क्रिकेट के हितधारक चिंतित हैं और क्रिकेट वेस्टइंडीज़ (सीडब्ल्यूआई) के मुख्य कार्यकारी क्रिस डेहरिंग ने कहा है कि वेस्टइंडीज क्रिकेट के हितधारक इस संबंध में अपनी बात रखने की उम्मीद कर रहे हैं।
रविवार और सोमवार को त्रिनिदाद में हुई सीडब्ल्यूआई की आपात बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डेहरिंग ने कहा, ”इस संबंध में हमें भूमिका अदा करनी होगी, हमें आईसीसी के समक्ष अपनी बात रखनी होगी। हमें उन तमाम बदलावों को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा और वेस्टइंडीज क्रिकेट के रूप में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि चाहे परिस्थिति जैसी भी हो हम उसका अधिक से अधिक लाभ उठाने का प्रयास करें।”
आईसीसी ने पिछले महीने न्यूजीलैंड के पूर्व बल्लेबाज रोजर टूज के नेतृत्व में एक कार्यसमूह (वर्किंग ग्रुप) का गठन किया था जिसका उद्देश्य 2025-2027 के चक्र से पहले डब्ल्यूटीसी में सुधार सहित अन्य मुद्दों पर विचार करना था। जुलाई में आयोजित आईसीसी की वार्षिक बैठक में डब्ल्यूटीसी के लिए दो स्तरीय प्रणाली लागू करने का मुद्दा चर्चा का सबसे अहम पहलू था। आईसीसी बोर्ड में न्यूजीलैंड क्रिकेट के प्रतिनिधि टूज से बोर्ड को सुझाव देने की उम्मीद है।
दो स्तरीय प्रणाली पर 15 वर्षों से भी अधिक समय पर बहस चल रही है, आईसीसी ने 2009 में ही इस पर विचार करने की इच्छा व्यक्त की थी लेकिन पूर्ण सदस्य देश विभिन्न कारणों से इस मुद्दे पर एकमत नहीं रहे हैं।
सीडब्ल्यूआई की आपात बैठक में वेस्टइंडीज़ के पूर्व क्रिकेटरों में क्लाइव लॉयड, ब्रायन लारा और विव रिचर्ड्स भी शामिल थे और लॉयड ने आईसीसी द्वारा सदस्य देशों को दिए जाने वाले वित्तीय हिस्से की ओर इशारा करते हुए कहा कि 70 और 80 की दशक में शीर्ष टीम और 90 के दशक में एक सफल टीम रही वेस्टइंडीज अपने प्रदर्शन में आई गिरावट के बावजूद इसकी हकदार है।
लॉयड ने कहा, ”हमें यह देखने होगा कि आईसीसी में पैसे के बंटवारे को लेकर क्या हो रहा है। भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को 18 करोड़ मिलेंगे जबकि वेस्टइंडीज को अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश की तरह 8 करोड़ मिलेंगे। हम अगले 100 वर्ष तक उस ग्रुप में बने रहने से सिर्फ दो साल दूर हैं। मेरे विचार में यह सही नहीं है और हमें आवाज उठानी होगी क्योंकि जब हम अच्छा खेल रहे थे तो हर कोई हमारे साथ खेलना चाहता था।”
लॉयड ने आगे कहा, ”हम नियमित तौर पर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड से खेला करते थे और जब हम भारत या पाकिस्तान जाते थे तो मैदान पर लाखों की भीड़ एकत्रित होती थी। चूंकि हम लंबे समय तक अधिक दूध देने वाली गाय (पैसा कमाने वाली टीम) रहे हैं इसलिए हमें उसमें से कुछ हिस्सा मिलना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि बोर्ड इस सिफारिश पर अमल करेगा ताकि हमें जरूरी पैसा मिल सके।”

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