
विदिशा। सरकारी तंत्र की लापरवाही और टालमटोल की मिसाल देखनी हो तो ग्यारसपुर जनपद पंचायत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां करीब छह साल से पंचायत अपनी ही दुकानों का किराया वसूल नहीं कर पा रही है. हालत यह है कि अब तक 51 लाख रुपये तक का बकाया हो चुका है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी केवल नोटिस जारी करने की औपचारिकता निभा रहे हैं.
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत जनपद पंचायत ग्यारसपुर में 29 दुकानें निर्मित की गई थीं, जिनका उद्देश्य गरीब, मजदूर, बेरोजगार और वंचित वर्गों को आत्मनिर्भर बनाना तथा पंचायत के लिए आय का स्थायी स्रोत तैयार करना था. लेकिन यह योजना घाटे का सौदा बन गई। वर्ष 2019 से अब तक लगभग 32 लाख रुपये का किराया बकाया दर्ज हुआ है, जो ब्याज सहित बढ़कर 51 लाख तक पहुंच गया है.
जानकारी यह भी सामने आई है कि कई दुकानदारों ने अमानत राशि तक जमा नहीं कराई, फिर भी उन्हें दुकानें आवंटित कर दी गईं. नतीजतन किराया वसूली दूर की बात रह गई. इनमें कई दुकानें ऐसे राजनीतिक और प्रभावशाली लोगों के कब्जे में हैं जो न तो किराया जमा कर रहे हैं और न ही दुकानें खाली करने को तैयार हैं. गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए शुरू की गई यह योजना अब रसूखदारों के कब्जे में सिमट गई है.
जनपद पंचायत के सीईओ जितेंद्र जैन ने बताया कि बकाया वसूली के लिए सहायक लेखा अधिकारी रमेश शर्मा को निर्देश दिए गए हैं और दुकानदारों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि निर्धारित समय में राशि जमा न करने पर दुकानदारों से दुकानें खाली कराकर पुनः नीलामी की जाएगी और जिनका बकाया रहेगा, उनका सामान जब्त किया जाएगा.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई की जाती, तो लाखों रुपये का राजस्व नुकसान नहीं होता. अब देखना यह है कि पंचायत प्रशासन इस बार वसूली के मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है.
