
नई दिल्ली, 07 नवम्बर (वार्ता): रणजी ट्रॉफी सत्र 2025-26 में पूर्व चैम्पियन विदर्भ का विजयी क्रम थम गया है। नगालैंड को हराने के बाद टीम लगातार दो मैच ड्रॉ खेलने पर मजबूर हुई है, जिसमें तमिलनाडु के खिलाफ हालिया मुकाबला भी शामिल है। कोयंबटूर में खेले गए इस मैच में टीम ने दो स्लो लेफ्ट-आर्म ऑर्थोडॉक्स गेंदबाजों के साथ उतरने का निर्णय लिया। विशेषज्ञों के अनुसार, हर्ष दुबे की गैरमौजूदगी और स्पिन अटैक में विविधता की कमी के कारण टीम जीत से चूक गई।
गेंदबाजी संतुलन पर उठे सवाल
मैच के अंतिम दिन तमिलनाडु को जीत के लिए 204 रनों की जरूरत थी, लेकिन विदर्भ की टीम केवल छह विकेट ही ले सकी और मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ। मीडियम पेसर प्रफुल्ल हिंगे ने चार विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें सहयोग नहीं मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टीम के पास कोई राइट-आर्म लेगब्रेक या ऑफ स्पिन विकल्प होता, तो आखिरी दिन की पिच पर अटैकिंग गेंदबाजी से जीत संभव थी।
हर्ष दुबे की कमी और अंकतालिका की स्थिति
टीम के प्रमुख ऑलराउंडर और स्लो लेफ्ट-आर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिनर हर्ष दुबे इस समय इंडिया ‘ए’ टीम के साथ हैं। उनकी अनुपस्थिति में विदर्भ का स्पिन विभाग अनुभवहीन और एकरूपी नजर आ रहा है, जिससे टीम को उनके अनुभव और आक्रामकता दोनों की कमी खल रही है। लगातार दो ड्रॉ मैचों के बाद विदर्भ टीम एक जीत और दो ड्रॉ के साथ 13 अंक लेकर अंकतालिका में दूसरे स्थान पर खिसक गई है। चयनकर्ताओं को अब स्पिन अटैक में विविधता लाने पर विचार करना चाहिए।
