
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में विरासत के संरक्षण के साथ विकास के तीव्र प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुरूप प्रदेश ने विरासत और आधुनिकता के संगम का एक आदर्श प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली इतिहास को मंच पर जीवंत करने का माध्यम बना है।
डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन वह ऐतिहासिक नगरी है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी। बाबा महाकाल की कृपा से यह भूमि सदैव आध्यात्मिकता और संस्कृति की प्रेरणा देती रही है। सम्राट विक्रमादित्य ने अपने न्याय, दानशीलता, ज्ञान और शौर्य के गुणों से शासन की एक अद्वितीय मिसाल कायम की। उन्होंने विक्रम संवत की स्थापना कर भारतीय संस्कृति को गौरवान्वित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बीते दो वर्षों में प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। मात्र डेढ़ वर्ष में 18 नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं, जिससे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ है। आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश अग्रणी बनकर उभरा है। हर जिले में पीएम एक्सीलेंस कॉलेज स्थापित किए गए हैं ताकि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में वृद्धि हो सके।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में पुलिस बैंड दल गठित किए गए हैं और इन बैंड्स को राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में सम्मानजनक स्थान मिला है। हाल ही में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर केवड़िया (गुजरात) में आयोजित समारोह में मध्यप्रदेश के पुलिस बैंड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया।
मुख्यमंत्री ने राजा भोज का स्मरण करते हुए कहा कि वे सम्राट विक्रमादित्य के लगभग एक हजार वर्ष बाद हुए, परंतु उनकी प्रशासनिक दृष्टि और जनकल्याण की भावना समान रूप से प्रेरक रही। भोपाल का विशाल भोजताल उनके दूरदर्शी शासन की पहचान है।
डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति के ऐसे महान नायकों की स्मृति में मध्यप्रदेश में आयोजनों का यह सिलसिला निरंतर चलता रहेगा। उन्होंने प्रदेशवासियों को 70वें स्थापना दिवस समारोह अभ्युदय मध्यप्रदेश के सफल समापन पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं तथा कहा कि विरासत से विकास की यह यात्रा अब और अधिक गति पकड़ेगी।
