
मंदसौर। रेवास-देवड़ा रोड स्थित प्रसिद्ध 151 सीढ़ियों वाला देव डूंगरी माता मंदिर श्रद्धा, चमत्कार और आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। मां अम्बे के जयकारों से गूंजता यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
हर रविवार को हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं और शांत, हरे-भरे वातावरण में आध्यात्म और प्रकृति का अनूठा संगम अनुभव करते हैं।
हाल ही में मंदिर परिसर में “दर्शन शुल्क” को लेकर एक गलतफहमी ने भक्तों के बीच हल्का भ्रम पैदा कर दिया। दरअसल, वन विभाग द्वारा नगर वन समिति के नाम से ₹10 का टोकन शुल्क शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य इको पार्क एवं बगीचे के रखरखाव, स्वच्छता, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए न्यूनतम सहयोग राशि लेना था। लेकिन कुछ लोगों द्वारा इसे “मंदिर दर्शन शुल्क” के रूप में प्रचारित किए जाने से विवाद की स्थिति बन गई।
इस संबंध में जय अम्बे देव डूंगरी माता भक्त मंडल के अध्यक्ष बंशी राठौर, सदस्य राधेश्याम मारू एवं जगदीश बैरागी ने स्पष्ट किया कि माता के दर्शन के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि “वन विभाग ने श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए शुल्क संग्रह को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है।”
वन विभाग के प्रभारी नरेंद्र मालवीय ने बताया कि यह ₹10 का टोकन केवल नगर वन (इको पार्क) क्षेत्र में रखरखाव और विकास कार्यों के लिए था, न कि मंदिर दर्शन हेतु। “देव डूंगरी माता मंदिर के दर्शन पूर्णतः निःशुल्क हैं और रहेंगे,” उन्होंने कहा।
इस पूरे मामले की जानकारी मिलने पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता अंशुल बैरागी स्वयं देव डूंगरी स्थल पहुंचे और वन विभाग अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि “माता के दरबार में किसी भी प्रकार का आर्थिक शुल्क नहीं होना चाहिए, विभाग ने इस पर तत्काल कार्रवाई की, यह सराहनीय है।”
इस अवसर पर राजेश जाट, महेंद्र सिंह पंवार सहित अन्य स्थानीय सदस्य उपस्थित रहे।
स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि देव डूंगरी माता मंदिर अब केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं रहा, बल्कि आस्था, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास का आदर्श केंद्र बन रहा है। वन विभाग द्वारा विकसित किया गया सुंदर बगीचा और नगर वन क्षेत्र (इको पार्क) यहां आने वाले आगंतुकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन गया है।
