
रीवा। सैनिक स्कूल रीवा में अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रतियोगिता 2025 का समापन हुआ. विजेता एवं उप विजेता टीमों को पुरस्कार स्वरूप ट्राफी प्रदान की गई. इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि जीत हार से ज्यादा जरूरी है खेल भावना से खेलों में भाग लेना. हार से परेशान नहीं होना चाहिए वरन जीतने के लिए पूरे प्रयास कर आगे बढऩे का संकल्प लेना चाहिए.
सैनिक स्कूल में राष्ट्रीय खेल के समापन अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा के लिये आज का दिन ऐतिहासिक है जबकि देश की सेना के दो प्रमुख सैनिक स्कूल रीवा के पूर्व छात्र यहां उपस्थित हैं और उनके हांथों से विजेता व उप विजेता टीमों को पुरस्कार मिला है. रीवा एवं विन्ध्य की धरा में दो सेना नायकों का दिल से अभिनंदन है. आज रीवा सैनिक स्कूल का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया है. रीवा की पहचान सफेद शेर व सोलर प्लांट से है लेकिन रीवा की पहचान अब यह है कि देश के तीन सेना प्रमुखों में से दो रीवा के हैं और एक ही स्कूल के सहपाठी भी हैं. श्री शुक्ल ने कहा कि हम सबकी इच्छा थी कि दोनों प्रमुख एक साथ कार्यक्रम में उपस्थित रहें आज सौभाग्य शाली दिन है जब दोनों सेना प्रमुख एक साथ उपस्थित हैं. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के हीरो हैं हमारे सेना नायक और हमें उन पर गर्व है. ऑपरेशन सिंदूर में हमारी सेना ने शौर्य, पराक्रम व आक्रमण का परिचय देते हुए दुश्मनों के ठिकानों को नेस्तानाबूद कर दिया था और भारत की आधुनिक रक्षा प्रणाली का प्रदर्शन देखने को मिला था.
खेल चरित्र निर्माण के माध्यम है: नौ सेना प्रमुख
इस अवसर पर नौ सेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि खेल चरित्र निर्माण के माध्यम है. मैदान में केवल खेल नहीं वह जीवन की दिशा दिखाते हैं. रीवा सैनिक स्कूल में आने पर मुझे हमेशा गर्व का अहसास होता है. गुरूजनों द्वारा दी गई शिक्षा व अनुशासन ने ही हमें आगे बढऩे का मार्ग प्रशस्त किया है. रीवा का सैनिक स्कूल राष्ट्रीय पहचान बन चुका है. नेशनल गेम्स में भाग लेने वाले कैडेट्स पूरे दृढ़ निश्चय व मनोयोग से अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़े और नित नई सफलताएं प्राप्त करें. उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले 540 विद्यार्थियों में 201 लड़कियाँ भी थीं. एडमिरल श्री त्रिपाठी ने कहा कि उद्देश्य, संयम और निरंतर प्रयास से ही हम विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा कर पायेंगे.
वीरता व समर्पण को आने वाली पीढ़ी याद रखेगी : थल सेना अध्यक्ष
कार्यक्रम में थल सेना अध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि ऐसे बनें कि दूसरे आप पर भरोसा करें. खेल के मैदान का अनुशासन व देश के प्रति समर्पण भाव से नागरिक सेवा का आधार बनते हैं. उन्होंने खिलाडिय़ों व कैडेट्स के उज्जवल भविष्य की कामना की. जनरल श्री द्विवेदी ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मैं अपने विद्यालय में उपस्थित हूँ. आज एकता दिवस भी है तथा एक नवम्बर को हमारा मध्यप्रदेश अपना 70वां स्थापना दिवस भी मनायेगा. उन्होंने रीवा व विन्ध्य की धरा के उन पूर्व सैनिकों का स्मरण किया जिन्होंने देश की रक्षा के लिये अपने प्राणों की आहुति दे दी. जनरल द्विवेदी ने कहा कि वीरता व समर्पण को आने वाली पीढ़ी याद रखेगी और युवाओं का मार्ग प्रशस्त करेगी. उन्होंने कहा कि मैं जब भी असमंजस में होता हूँ तब मुझे मेरे शिक्षकों की सीख काम आती है. उन्होंने कैडेट्स से शारीरिक व मानसिक तौर पर सुदृढ़ रहने की बात कही. जनरल द्विवेदी ने कहा कि विद्यालय के जीवन मूल्यों ने मुझे आगे बढ़ाया. आप सबके आशिर्वाद से मुझे चुनौतियों का सामना करने का संबल मिला. उन्होंने अपने कर्तव्य पर दृढ़ निश्चय रहकर आत्मनिर्भर देश के निर्माण की बात कही.
प्रतीक चिन्ह देकर किया गया सम्मान
इससे पूर्व सेना प्रमुखों व अतिथियों का सैनिक स्कूल रीवा द्वारा प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया गया. उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सफेद शेर की प्रतिकृति थल सेना अध्यक्ष व नौ सेना प्रमुख को भेंट की. सेना प्रमुखों ने भी उप मुख्यमंत्री जी को ब्राम्होस एवं शिपमाडल की प्रतिकृति भेंट की. नौ सेना प्रमुख ने सैनिक स्कूल को दो लाख रूपये की चेक भी प्रदान किया. आभार प्रदर्शन करते हुए सैनिक स्कूल में आयोजित नेशनल गेम्स के बारे में जानकारी प्राचार्य कर्नल अविनाश रावल ने दी.
ओवर आल ट्राफी सैनिक स्कूल झुंझनू को
उल्लेखनीय है कि सैनिक स्कूल रीवा में आयोजित नेशनल खेल-2025 में बास्केटबाल जूनियर में विजेता सैनिक स्कूल कपूरथला व उप विजेता सैनिक स्कूल झुंझनू रहे. जबकि जूनियर वर्ग में विजेता घोघापाल एवं सैनिक स्कूल विकासा रहे. इसी प्रकार वालीबाल में विजेता सैनिक स्कूल नालंदा, उप विजेता झुंझनू एवं एथलेटिक्स में विजेता अमरावती नगर व उप विजेता खाराखेरी रहे. सांस्कृतिक आयोजन प्रतियोगिता में विजेता का पुरस्कार सैनिक स्कूल चन्द्रपुर व उप विजेता का पुरस्कार पुंगलवा गोलपावा को मिला. जबकि ओवर आल ट्राफी सैनिक स्कूल झुंझनू को प्राप्त हुई.
