खरगापुर: जिले में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को बल देते हुए खरगापुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम खरों में ग्रामीणों ने नशा मुक्ति की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। गांव के लोगों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि अब गांव में न तो शराब बनाई जाएगी, न बेची जाएगी और न ही गांजा का कारोबार होगा।ग्रामीणों ने नशे से दूरी के लिए कठोर नियम भी बनाए हैं।
तय किया गया है कि कोई व्यक्ति नशा करते पकड़ा गया तो उसे 21,000 का जुर्माना भरना होगा, वहीं शराब या गांजा पीकर उपद्रव मचाने वाले को 11,000 का दंड दिया जाएगा। इसके अलावा नशे में लिप्त पाए गए व्यक्ति को एक वर्ष तक समाज से बहिष्कृत करने का भी निर्णय लिया गया है।ग्रामवासियों का कहना है कि यदि ऐसे सख्त कदम नहीं उठाए गए तो नशे की समस्या से छुटकारा पाना मुश्किल होगा।
टीकमगढ़ जिले में यह पहली बार नहीं है कि किसी पंचायत ने शराबबंदी का निर्णय लिया हो। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती द्वारा चलाए जा रहे शराबबंदी आंदोलन और पुलिस अधीक्षक द्वारा संचालित अभियान नशे से दूरी है जरूरी से प्रेरित होकर जिले की कई पंचायतें इस दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं। पिछले एक माह में दर्जनों ग्राम पंचायतों ने इसी तरह के फैसले लेकर नशा मुक्ति की पहल की है।
हाल ही में श्रीनगर गांव में भी ग्रामीणों ने शराबबंदी का निर्णय लिया है। गांव के महेश पटेरिया ने बताया कि सबकी एकजुटता से यह फैसला लिया गया है ताकि आने वाले समय में उनका गांव “नशा मुक्त गांव के रूप में पहचाना जा सके।ग्रामीणों की यह मुहिम अब पूरे टीकमगढ़ जिले में एक सकारात्मक उदाहरण बनती जा रही है।
