जबलपुर: नियमों को ताक पर रखकर सीधी नगर पालिका में अवैध कालोनियों का निर्माण कर प्लाट विक्रय किये जाने को चुनौती देने वाले मामले को हाईकोर्ट ने सख्ती से लिया। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले में सरकार को निर्देशित किया है वह सुनिश्चित करें कि मामले की अगली सुनवाई तक अवैध रूप से कालोनियों व प्लाटिंग का निर्माण न हो। युगलपीठ ने उक्त अंतरिम आदेश देते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
यह जनहित का मामला रीवा निवासी समाज सेवी मधवेश तिवारी की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता विकास मिश्रा ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि सीधी नगर पालिका परिषद क्षेत्र में बिल्डरों द्वारा बिना परमीशन के प्लाटिंग कर अवैध कालोनियों का निर्माण कर प्लाटों का विक्रय किया जा रहा है। इसके लिये न तो टीएनसीपी से परमीशन ली गई है और न ही अन्य विभागों से किसी प्रकार की अनुमति। इतना ही नहीं उक्त कालोनियों में न तो सडक़, नाली का निर्माण किया गया।
सीधे जमीन लेकर उस पर प्लाट काटकर बेचे जा रहे है, जो कि सीधे-सीधे लोगों के साथ ठगी है। दलील दी गई कि कालोनाईजर एक्ट का उल्लंघन करने पर एफआईआर दर्ज किये जाने का प्रावधान है, लेकिन उसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की जा रहीं है और उक्त अवैध कार्य को बे-रोकटोक किया जा रहा है। मामले में मप्र शासन के प्रमुख सचिव, सीएमओं नगर पालिका सीधी, टीएनसीपी अधिकारी सीधी व नरेश प्रसाद पांडे एवं अजय सिंह चौहान को पक्षकार बनाया गया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त अंतरिम आदेश देते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
