भोपाल। विद्याप्रमाण गुरूकुलम में आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि बुराकर्म हमेशा बुरा ही रहेगा, चाहे उसे कोई कितना भी अच्छा कहे या दान करे, वह कभी शुभ नहीं बन सकता। मुनि श्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे डकैत डकैती कर मंदिर में घंटा चढ़ाते थे, वैसे ही आज कुछ लोग गलत कार्यों से धन कमाकर दान करते हैं, जो पुण्य नहीं कहलाता। उन्होंने कहा कि जैसी करनी वैसी भरनी बबूल बोने से मीठे फल नहीं मिल सकते। जो अपनी आत्मा का अहित करता है, वह दूसरों का हित नहीं कर सकता। इसलिए व्यक्ति को अपने कर्मों की समीक्षा कर आत्महित व परहित के मार्ग पर चलना चाहिए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने यह जानकारी दी।
