
भोपाल: पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर किसानों के साथ विश्वासघात, मंडी बोर्ड में वित्तीय अव्यवस्था, और कृषि तंत्र के निजीकरण की साजिश रचने का आरोप लगाया।
किसानों को नहीं मिल रहा उचित मूल्य
यादव ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की मांग को लेकर किसानों का लंबा आंदोलन चलने के बावजूद सरकार ने अब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की हैं। सोयाबीन, जिसका समर्थन मूल्य ₹5,328 प्रति क्विंटल है, वह केवल ₹3,500 में बिक रहा है। इसी तरह मक्का और कपास उत्पादक किसानों को भी उचित दाम नहीं मिल रहे। उन्होंने कहा, “केंद्रीय कृषि मंत्री भले ही मध्यप्रदेश से हों, लेकिन यहां के किसानों को एमएसपी का लाभ नहीं मिल रहा है।”
‘भावांतर योजना’ और मंडी बोर्ड संकट
यादव ने भावांतर योजना को पूरी तरह विफल बताते हुए कहा कि सरकार आर्थिक संकट से जूझ रहे मंडी बोर्ड — जो एक स्वायत्त संस्था है — पर ₹1,500 करोड़ का कर्ज लेने का दबाव बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम मंडी अधिनियम 1972 का उल्लंघन है और इससे मंडी बोर्ड को बंद करने की साजिश झलकती है।
निजीकरण की साजिश और किसानों की अनदेखी
यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार कृषि व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रच रही है। सरकार की नीतियां किसानों के बजाय ठेकेदारों और व्यापारियों के हित में हैं। उन्होंने मांग की कि भावांतर योजना को तत्काल बंद किया जाए, एमएसपी लागू किया जाए, और केला व कपास उत्पादक किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों के संघर्ष में पूरी मजबूती से साथ खड़ी है और किसानों के हक की लड़ाई को “खेती से लेकर सड़क तक” जारी रखेगी, जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।
