
मंदसौर। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के सहयोग से मंदसौर जिले के ग्राम करजू के युवा केशव बैरागी ने “वैष्णव ग्रीन फ्लेम रिवॉल्यूशन” अभियान की शुरुआत की है, जो देश की रसोई को एलपीजी मुक्त बनाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नई राह दिखा रहा है।
केशव ने 9.50 लाख रुपये के लोन से कृषि अवशेषों से बने बायो-कोल पैलेट्स पर आधारित चूल्हों का निर्माण शुरू किया। आज उनकी तकनीक से 1000 से अधिक परिवार और 100 से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठान एलपीजी की जगह लगभग 50% कम खर्च में खाना पका रहे हैं।
इस “ग्रीन फ्लेम क्रांति” का उद्देश्य है — कार्बन-न्यूट्रल कुकिंग, ग्रामीण सशक्तिकरण और आयात पर रोक। इससे किसानों को खेतों के अवशेष बेचने, महिलाओं को पैलेट सप्लाई में और युवाओं को वितरण नेटवर्क में रोजगार मिल रहा है।
मंदसौर को इस मॉडल से हर साल लगभग 1 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड की बचत और 60 से 90 करोड़ रुपये तक की संभावित आय होगी। यह पहल मंदसौर को भारत का पहला कार्बन-न्यूट्रल कुकिंग मॉडल जिला बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हो रही है।
