यूक्रेन को 150 उन्नत स्वीडिश लड़ाकू विमान मिलने की संभावना

स्टॉकहोम, 24 अक्टूबर (वार्ता) उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन नाटो के नए सदस्य स्वीडन ने कहा है कि वह यूक्रेन को अपने 150 सबसे उन्नत लड़ाकू विमान बेचने को तैयार है। यह गठबंधन के किसी सदस्य की ओर से यूक्रेन को भारी संख्या में लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने का पहला प्रस्ताव होगा।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को यू्क्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के बीच इस आशय का समझौता हुआ। इसमें 100 से 150 साब ग्रिपेन-ई विमानों की शर्तें, लागत और आपूर्ति की तारीखें अभी तय नहीं हुयी हैं।

यूक्रेन और स्वीडन का कहना है कि इस समझौते में न केवल यूक्रेन के लिये रूस के खिलाफ अपनी लड़ाई में और अधिक हवाई लड़ाकू क्षमताओं की जरूरत है बल्कि उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) और समग्र रूप से यूरोपीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा बदलाव लाने की क्षमता है।

श्री जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर लिखा, यूक्रेन और स्वीडन अपने संबंधों में एक बिलकुल नया और एक सार्थक अध्याय शुरू कर रहे हैं जो व्यापक रूप से यूरोप में समग्र सुरक्षा संबंधों पर आधारित है।”

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने लिखा, “ये बहुत ही शानदार विमान हैं। शक्तिशाली विमानन प्लेटफॉर्म हैं जो कई तरह के कार्य करने में सक्षम हैं।” श्री क्रिस्टर्सन ने एक बयान में कहा, “इससे यूक्रेन, स्वीडन और यूरोप सब मजबूत होंगे।”

गौरतलब है कि स्वीडन 2024 में अपने नॉर्डिक पड़ोसी फिनलैंड के साथ नाटो में शामिल हुआ। इस गठबंधन में उनके प्रवेश ने गुटनिरपेक्षता की दीर्घकालिक नीतियों को समाप्त कर दिया, जो रूस के यूक्रेन पर आक्रमण से प्रेरित था।

रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था जिसके बाद से लड़ाकू विमान यूक्रेन के लिए एक बड़ी जरूरत बन गये हैं। उस समय यूक्रेन की वायु सेना में मुख्यतः सोवियत युग के विमान शामिल थे। हालांकि पश्चिमी देश पुराने अमेरिकी निर्मित F-16 मॉडल के साथ-साथ कुछ फ्रांसीसी मिराज विमानों के साथ उसकी की सहायता करते रहे हैं लेकिन ये रूसी विमानों का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

गौरतलब है कि बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस में अंदर तक मारक क्षमता वाली लंबी दूरी की टॉमहॉक मिसाइलें हासिल करने के श्री जेलेंस्की के प्रयास को अस्वीकार कर दिया था, जिसके बाद स्वीडन ने यह घोषणा की है।

श्री ट्रंप ने बुधवार को कहा कि जेलेंस्की के अनुरोध को अस्वीकार करने का एक कारण यह था कि टॉमहॉक के लिए लंबे प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, “टॉमहॉक का इस्तेमाल करने के लिए आपको छह महीने का प्रशिक्षण लेना पड़ता है। वैसे आमतौर पर इसमें एक साल का वक्त लग जाता है और यह बहुत कठिन है।”

 

 

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