जबलपुर:मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने अपने एक आदेश में स्पष्ट किया कि शासकीय कर्मी के आपराधिक प्रकरण में दंडित न होने पर महज विभागीय जांच के आधार पर सेवा समाप्ति की सूरत में ग्रेच्युटी की राशि जब्त नहीं की जा सकती। इसलिये याचिकाकर्ता को छह प्रतिशत ब्याज सहित 60 दिन के भीतर राशि भुगतान के निर्देश दिये जाते है।
याचिकाकर्ता शहडोल निवासी बबीता मोर की ओर से अधिवक्ता आशीष त्रिवेदी, अपूर्व त्रिवेदी व आनंद शुक्ला ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता के दिवंगत पति केंद्रीय मप्र ग्रामीण बैंक के कर्मी थे। उन पर घोटाले का आरोप लगा था। जिसके आधार पर विभागीय जांच प्रारंभ की गई। जिसके आधार पर ग्रेच्युटी जब्त करने की कार्रवाई कर दी गई। बावजूद इसके कि याचिकाकर्ता के पति के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण में कोई दांडिक आदेश पारित नहीं हुआ। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त राहतकारी आदेश दिया।
