सागर: 22 अक्टूबर की रात जब भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या दीपों के महासमुद्र से जगमगा रही थी, तभी सागर की समर्थ लोक कला संस्था ने अपनी पारंपरिक बुंदेली बधाई लोक नृत्य प्रस्तुति से समां बाँध दिया। मुख्य मंच पर पारंपरिक बुंदेली परिधान, रंगीन पगड़ियों और लोक वाद्यों की धुन के साथ जब कलाकार थिरके, तो रामनगरी में उपस्थित दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए।
संस्था की निदेशक निधि चौरसिया ने बताया कि अयोध्या की पावन भूमि पर बुंदेली लोकनृत्य प्रस्तुत करना गर्व की बात है। यह केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति हमारी जड़ों की आत्मा है, जिसे श्रीराम की नगरी में प्रस्तुत करना अपनेपन का अनुभव कराता है।
बधाई नृत्य टीम में अंकित, नीलम, भूइंद्र, आस्था, यशवंत, रूमेश, भानु, देशराज, नीरज, शनि और सानिया जैसे युवा कलाकारों ने अपने नृत्य-भाव और लय से दर्शकों का दिल जीत लिया। तीन दिवसीय दीपोत्सव में कई सांस्कृतिक दलों ने लोक परंपराएं प्रस्तुत कीं, जिनमें बुंदेली बधाई नृत्य सबसे आकर्षण का केंद्र रहा।
रात्रि के अंत में रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने श्रद्धालुओं को मोहित कर दिया, वहीं अयोध्या की पावन भूमि पर बुंदेलखंड की यह झलक सभी के लिए अविस्मरणीय बन गई।
