ग्राम जावती का दीप उत्सव: आस्था, एकता और परंपरा का है अद्भुत संगम

लटेरी: विदिशा जिले के ग्राम जावती में दीपावली केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, एकता और सतत परंपरा का जीवंत उदाहरण बन चुका है. इसे यहाँ विशेष रूप से दीप उत्सव के नाम से मनाया जाता है, और पूरे गाँव में हजारों दीपों की ज्योति इस तरह जगमगाती है कि मानो धरती पर स्वर्ग उतर आया हो.यह परंपरा वर्ष 2016 में आरंभ हुई थी, जब बाल रूप हनुमान मंदिर में अखंड ज्योति स्थापित की गई. तब से यह दीप बिना रुके और बुझाए आज तक प्रज्वलित है, जो गाँव की आस्था और एकता का प्रतीक बन चुका है.
हर वर्ष दीपावली पर 21,551 दीपक जलाकर मंदिर प्रांगण और पूरे गाँव को जगमगाया जाता है. दीप जलाने और सजावट में गाँव की महिलाएँ, बच्चे और युवा सामूहिक रूप से भाग लेते हैं. बुजुर्ग भजन-कीर्तन और आरती में अपनी सहभागिता देते हैं.इस आयोजन में पप्पू भगत जी की भूमिका विशेष है. वे प्रतिदिन 151 दीपक स्वयं प्रज्वलित करते हैं और पुष्पमालाएँ बनाकर मंदिर सेवा में लगे रहते हैं. उनका कहना है कि यह दीप केवल मिट्टी और तेल का नहीं, बल्कि श्रद्धा, परंपरा और भगवान के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है.
ग्राम जावती का दीपोत्सव केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में एकता, भाईचारे और सामूहिक सहयोग का संदेश भी देता है. जाति, वर्ग या स्थिति से ऊपर उठकर हर कोई इस पवित्र पर्व में योगदान देता है. वरिष्ठ नागरिकों का मानना है कि जब पूरा गाँव दीप जलाता है, तो मंदिर ही नहीं, हर हृदय भी प्रकाशमान होता है.
स्थानीय लोगों का संकल्प है कि यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहे. दीपों की यह ज्योति केवल उजाला ही नहीं फैलाती, बल्कि अंधकार, नफरत और भेदभाव को भी मिटाने का प्रतीक बन चुकी है.

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