राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की बैठक में पीएम-जेएवाई और एबीडीएम की प्रगति का मूल्यांकन

नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (वार्ता) मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) की दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक (15-16 अक्टूबर) में देश की दो प्रमुख स्वास्थ्य पहलों – आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की प्रगति का मूल्यांकन करने और भविष्य की रूपरेखा तैयार करने पर मंथन किया गया।
एनएचए की बैठक में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में रणनीतिक गठबंधन और ज्ञान के आदान-प्रदान किया गया।
दो दिवसीय बैठक में एनएचए ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सर्वोत्तम प्रथाओं का एक संग्रह जारी किया, जिसमें पीएम-जेएवाई और एबीडीएम के तहत प्रभाव और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया।
इस समीक्षा बैठक का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यान्वयन का आकलन करना, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना और सामूहिक रूप से पीएम-जेएवाई 2.0 और एबीडीएम 2.0 के लिए रोडमैप तैयार करना था। चर्चाओं में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, सेवा वितरण को बेहतर करने और स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अंतर-राज्यीय सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने पीएम-जेएवाई 2.0 और एबीडीएम 2.0 के तहत गहन एकीकरण और मापनीयता के दृष्टिकोण पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “यह समीक्षा डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण को गहन बनाने और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की हमारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण क्षण है। आयुष्मान भारत अपने चार मज़बूत स्तंभों के साथ 45 करोड़ से ज़्यादा लोगों को लाभान्वित कर चुका है।”
डॉ. बरनवाल ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके अनुकरणीय दावा प्रबंधन प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, और लद्दाख को जीरो पेंडेंसी माह पहल के तहत सम्मानित किया गया।
इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पूर्व सचिव और राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य ब्लूप्रिंट के अध्यक्ष जे. सत्यनारायण ने कहा, “हम एबीडीएम 2.0 रिपोर्ट तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो हमें दुनिया में शीर्ष पर ले जाएगी। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सर्वोत्तम और कार्यान्वयन योग्य विचारों की जरूरत है।”
इस अवसर पर, एनएचए ने भोपाल में पीएमजेएवाई और एबीडीएम राष्ट्रीय समीक्षा में अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 भी जारी की। पीएमजेएवाई में संयुक्त सचिव ज्योति यादव ने पीएमजेएवाई के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रमुख प्रगति और प्रदर्शन की झलकियां प्रस्तुत कीं, जिसमें दावा प्रबंधन, लाभार्थी कवरेज, गतिशील पैनलीकरण और बेहतर पोर्टेबिलिटी में उपलब्धियां प्रदर्शित की गईं। उन्होंने पीएमजेएवाई 2.0 को आकार देने के लिए राज्यों के साथ गहन सहयोग की जरूरत पर भी ज़ोर दिया।
एबीडीएम के संयुक्त सचिव और मिशन निदेशक किरण गोपाल वासका ने आगामी एबीडीएम सूचकांक की घोषणा करते हुए कहा, “एबीडीएम सूचकांक जवाबदेही और नवाचार का एक प्रमुख प्रवर्तक होगा। स्वास्थ्य सेवा समन्वय आंकड़ों और सम्मान के बीच का सेतु है, पीएम-जेएवाई के साथ एबीडीएम का एकीकरण एक क्रांतिकारी कदम है।”
सत्र के दूसरे दिन, अनुराग जैन ने एबीडीएम और पीएम-जेएवाई पहलों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा व्यवहार परिवर्तन और संस्थागतकरण की जरूरत पर बल दिया।
एनएचए के निदेशक (एबीडीएम) विक्रम पगारिया ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वर्तमान में लागू की जा रही एबीडीएम की सर्वोत्तम प्रथाओं का अवलोकन प्रस्तुत किया।

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