भोग-विलास नहीं, त्याग और संयम जीवन का सच्चा ध्येय

भोपाल। अवधपुरी स्थित गुणायतन में शनिवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के सानिध्य में हुआ। शांतिधारा, अभिषेक और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने सामूहिक नृत्य करते हुए प्रभु के 1008 नामों से अर्घ समर्पित किए। मुनि श्री ने प्रवचन में कहा कि भगवान का स्मरण हृदय में कमल खिलाने वाला होता है। उन्होंने कहा भोग-विलास जीवन का साध्य नहीं, त्याग और संयम ही जीवन का सच्चा ध्येय होना चाहिए। मुनि श्री ने कहा कि दुनियादारी में उलझे रहने से ईश्वर की शरण में आने का अवसर दुर्लभ होता है, इसलिए जीवन का हर पल भक्ति और आराधना में समर्पित करना चाहिए। मुनि संधानसागर ने मंत्रोच्चार के साथ विधान समापन की क्रियाएं संपन्न कराईं।

 

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