गंजबासौदा:शांति वन के नाम से प्रसिद्ध शमशान घाट पर गाय माता और सांडों का स्थाई बसेरा बन गया है. यहाँ भूखी-प्यासी गायें और हिंसक सांड लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं. दाह संस्कार के लिए आए कई लोग इन सांडों के हमले का शिकार हो चुके हैं। पिछले एक वर्ष में चार लोगों की जान जा चुकी है और अनेक घायल हो चुके हैं.
स्थानीय लोग बताते हैं कि श्मशान घाट में गंदगी और बदबू का भी बोलबाला है.
गौशाला संचालक इन आवारा पशुओं को हटाने की कोई पहल नहीं करते. वहीं, दुधारू गायों का व्यापार जारी है. कई बार बछड़े, बेल और सांड कार्यक्रमों के लिए लाए जाते हैं, लेकिन बाद में गौशाला से भगा दिए जाते हैं.दानदाता चाहे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या पुण्यतिथि पर दान जरूर करते हैं, लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं दिखता. राजनेता और समाजसेवी कार्यक्रमों में पहुंचकर सराहना करते हैं, लेकिन वास्तविक गौ सेवा का पालन नहीं हो रहा. स्थानीय लोग सुधार की बात करते हैं तो आलोचना का सामना करना पड़ता है.
