जबलपुर: गोला-बारूद बनाना संवेदनशील काम है जिसे अब भारत सरकार ने ओपन मार्केट में ला दिया है। प्राइवेट कंपनियों में जहां प्रतिस्पर्धा के कारण कीमत कम होगी तो वहीं इसकी क्वालिटी में भी फर्क आएगा ,जिससे हमारे सैनिकों की जान पर नुकसान की हमेशा संभावना बनी रहेगी। ये निजीकरण का काम भारत सरकारद्वारा आज टाटा, अंबानी को दिया जा रहा है। जो कि बिल्कुल गलत है। ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लॉय फेडरेशन इस फैसले का विरोध करती है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जीसीएफ में बने एल-70 गन ने जिस तरह कोहराम मचाया वह जग जाहिर है। ये सारी बातें एआईडीईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसएन पाठक ने कहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि आज का समय आयुध निर्माणियों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बदलने का है लेकिन सरकार गलत फैसले लेकर आठ निर्माणियों को बंद करने की कगार पर धकेल रही है। जीसीएफ मजदूर संघ हथौड़ा के अध्यक्ष विनय गुप्ता, महामंत्री रोहित यादव , उत्तम विश्वास ने कहा है कि ये सरकार मजदूर विरोधी है क्योंकि पहले गोला बारूद बनाने के लिए निर्माणियों से एनओसी लेनी पड़ती थी लेकिन अब इस व्यवस्था को सरकार ने बंद कर दिया है जो कि गलत है।
निगमीकरण के खिलाफ जारी रहेगा संघर्ष
निगमीकरण के मुद्दे पर एसएन पाठक द्वारा कहा गया निगमीकरण के खिलाफ हमारे संघर्ष जारी रहेगा। पूर्व में दो रक्षा मंत्री द्वारा आयुध निर्माणियों को निगमी कारण नहीं होने का वादा किया गया था मगर वर्तमान सरकार निगमीकरण के रास्ते निर्माणियों को प्राइवेट कंपनी में झोंकने का काम कर रही है जो पूर्णत: कर्मचारी विरोधी है। श्री पाठक के अनुसार प्रदर्शन की कड़ी में 10 मार्च को 41 आयुध निर्माणियों में पर्चा वितरण एवं 14 मार्च को गेट मीटिंग के माध्यम से कर्मचारियों को संबोधित किया जाएगा और आने वाले समय में फेडरेशन हड़ताल के बारे में भी विचार करेगी।
