धर्मेद्र सिंह चौहान
इंदौर: शहर की मेट्रो ट्रेन, जिसका सपना नागरिकों ने वर्षों से देखा था, अब तफरी ट्रेन बनकर रह गई है. सुपर कॉरिडोर पर चल रही मेट्रो ट्रेन में यात्रियों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है. अगस्त में जहां 12,021 यात्रियों ने सफर किया था, वहीं सितंबर में यह घटकर सिर्फ 5,067 रह गई यानी औसतन हर दिन केवल 168 लोग मेट्रो में सवार हुए.इंदौर में मेट्रो ट्रेन को अभी सिर्फ प्रायोरिटी कॉरिडोर पर चलाया जा रहा है, जिसकी लंबाई करीब 6 किलोमीटर है.
यह ट्रेन गांधी नगर से हीरानगर के बीच सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में सीमित है, जहां यात्रियों की नियमित आवाजाही पहले से बहुत कम रहती है. इस कारण फिलहाल यह ट्रेन नागरिकों की जरूरत के बजाय घूमने-फिरने का साधन बन गई है. जब मई में इसका परीक्षण संचालन शुरू हुआ था, तब शहर के हजारों लोगों ने सिर्फ मेट्रो का अनुभव लेने के लिए टिकट खरीदे.
सेल्फी और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने इंदौर मेट्रो को चर्चा में ला दिया था. परंतु अब वही रफ्तार सुस्त पड़ गई है. 20 सितंबर से रियायती किराया समाप्त होने के बाद लोगों ने इसका इस्तेमाल और भी कम कर दिया. शहर के अधिकतर इलाकों जैसे विजय नगर, राजवाड़ा, बाणगंगा और एयरपोर्ट से इसका कोई सीधा संपर्क नहीं है, इसलिए रोजमर्रा के यात्री इसे अपनी यात्रा का हिस्सा नहीं बना पा रहे हैं.
अब ये सफर सिर्फ घूमने तक सिमट गया है यात्रियों का कहना
सुपर कॉरिडोर पर रह कर होलकर कॉलेज में एमएससी की पढ़ाई कर रहे गौरव परसाई ने बताया, पहले दोस्तों के साथ घूमने के लिए मेट्रो जाता था, लेकिन अब इसका टाइम टेबल बदलते रहता हैं, किराया भी बढ़ गया है, जिसके चलते अब बाइक से जाना आसान लगता है.
वहीं रेनेसा कॉलेज में पढ़ाई कर रही खुशी मलोदिया का कहना है कि मेरा कॉलेज उज्जैन रोड़ पर है, मगर वहां तक मेट्रो नहीं जाती. जब तक ये एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन से नहीं जुड़ेगी, इसका असली फायदा किसी को नहीं मिलेगा. वहीं अन्य यात्रियों का कहना है कि ट्रेन का टाइम टेबल कई बार बदला गया है. रविवार को कभी-कभी ट्रेन चलने में भी देरी होती है, जिससे उन्हें भरोसा नहीं रहा कि यह नियमित सुविधा बन पाएगी.
यात्रियों की कमी से फेरे घटाए, 5वीं बार बदला टाइम टेबल
मेट्रो में यात्रियों की कमी को देखते हुए मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन ने ट्रेनों के फेरे कम कर दिए हैं. अब सोमवार से शनिवार तक दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे के बीच हर दो घंटे में एक ट्रेन चलेगी, जबकि रविवार को हर एक घंटे के अंतराल पर ट्रेन संचालित की जाएगी. सूत्रों के मुताबिक, यह पाँचवाँ मौका है जब ट्रेन का टाइम टेबल यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए बदला है.
अधिकारियों का पक्ष पूरे नेटवर्क के शुरू होते ही संख्या बढ़ेगी
मेट्रो रेल प्रोजेक्ट से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, अभी ट्रेन सीमित क्षेत्र में चल रही है, जहां लोगों की ट्रैफिक जरूरत कम है. जैसे ही यह एयरपोर्ट, विजय नगर, बाणगंगा और मालवीय नगर तक पूरी तरह जुड़ जाएगी, यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ेगी. फिलहाल टीम दिन-रात परीक्षण और कमीशनिंग कार्य में जुटी है.
इंदौर मेट्रो का तब से अब तक का सफर
विवरण तथ्य
परियोजना की नींव 21 अगस्त 2019 को रखी गई
पहला पिलर खुदाई वर्ष 2020 में सुपर कॉरिडोर पर शुरू
उद्घाटन परीक्षण संचालन 31 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल उद्घाटन
कुल प्रस्तावित लंबाई (फेज-1) 31.32 किलोमीटर (28 स्टेशन)
वर्तमान संचालन दूरी लगभग 6 किलोमीटर (गांधी नगर से हीरानगर तक)
अनुमानित बजट (फेज-1) 7,500.80 करोड़
अब तक की लागत लगभग 5,000 करोड़ खर्च
मुख्य लक्ष्य क्षेत्र एयरपोर्ट, बाणगंगा, राजवाड़ा, विजय नगर, सुपर कॉरिडोर
पूरा होने की संभावित तिथि वर्ष 2026 के मध्य तक
नाम मेट्रो, काम मिनी ट्रेन जैसा
कहने को यह मेट्रो ट्रेन है, लेकिन सीमित रूट, कम रफ्तार और घटती सवारियों के चलते यह बचपन की ट्रेन जैसी लगने लगी है. जब तक इसका नेटवर्क शहर के भीतरी इलाकों, बाजारों और सरकारी दफ्तरों से नहीं जुड़ेगा, तब तक यह शहर की यात्रा में क्रांति लाने का सपना अधूरा ही रहेगा
