
पिपलियामण्डी। नारायणगढ़ थाना क्षेत्र में टाटा हेरियर कार से 2 क्विंटल 86 किलो डोडाचूरा बरामदगी का मामला अब जांच की पारदर्शिता को लेकर चर्चा में है। राजस्थान के जालोर व बाड़मेर निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार कर दो दिन के रिमाण्ड पर पूछताछ के बाद भी पुलिस एफआईआर में इस नेटवर्क के मुख्य सूत्रधारों के नाम शामिल नहीं कर पाई।
गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में करड़ा निवासी राकेश गोदारा, ललित गोदारा और दिनेश विश्नोई के नाम लिए, जिन्हें फरार बताया गया। तकनीकी जांच (कॉल डिटेल, लोकेशन, आरटीओ रिकॉर्ड आदि) के बावजूद डोडाचूरा की आपूर्ति श्रृंखला और आदेश देने वाले नेटवर्क का खुलासा नहीं हो सका। इससे सामाजिक संगठनों व नागरिकों में यह धारणा बनी है कि जांच में बड़े नामों को बचाने की कोशिश हो रही है।
कुछ समय पूर्व बालागुड़ा प्रकरण में भी मजदूरों को आरोपी बनाया गया था जबकि मुख्य आरोपी राजनीतिक संरक्षण में खुले घूम रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल वाहकों को पकड़ने से नेटवर्क खत्म नहीं होगा; सप्लाई के हब, वित्तीय लेन-देन और संरक्षकों तक जांच जरूरी है। नागरिक समूहों ने पारदर्शी जांच और एफआईआर में शीर्ष कड़ियों को शामिल करने की मांग की है।
इस घटना ने नशा तस्करी के बढ़ते नेटवर्क और पुलिस की जांच पद्धति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग चेतावनी दे रहे हैं कि अगर जड़ तक नहीं पहुँचा गया तो यह अवैध व्यापार युवाओं और समाज के लिए बड़ा खतरा बनता रहेगा।
