चमोली/नई दिल्ली | उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल स्थित वाण गांव की बेटी भागीरथी बिष्ट ने दिल्ली मैराथन के 11वें संस्करण में रजत पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया है। मात्र 3 वर्ष की आयु में पिता को खोने वाली भागीरथी ने अभावों के बीच पलकर यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने महिला वर्ग की 42.195 किलोमीटर लंबी फुल मैराथन को महज 2 घंटे 43 मिनट में पूरा किया। नेशनल और हैदराबाद मैराथन की विजेता रहीं भागीरथी की इस उपलब्धि से उनके पैतृक गांव में खुशी की लहर है, जहाँ लोग उन्हें प्यार से ‘फ्लाइंग गर्ल’ के नाम से पुकारते हैं।
भागीरथी की इस उड़ान के पीछे उनके कोच सुनील शर्मा का कड़ा अनुशासन और मार्गदर्शन है। हिमाचल प्रदेश से शुरू हुआ यह सफर अब पौड़ी गढ़वाल के हाई एल्टीट्यूड रांसी स्टेडियम तक पहुँच चुका है। कोच सुनील शर्मा ने बताया कि भागीरथी की तैयारी के लिए वे सुबह 3 बजे से अभ्यास शुरू करते थे। पिछले एक साल की कड़ी मेहनत का ही परिणाम है कि भागीरथी ने अपने समय में बड़ा सुधार किया है। 2025 की हैदराबाद मैराथन में उनका समय 2 घंटे 51 मिनट था, जिसे उन्होंने दिल्ली मैराथन में घटाकर 2 घंटे 43 मिनट कर लिया है।
दिल्ली मैराथन में शानदार प्रदर्शन के बाद अब भागीरथी बिष्ट का अगला लक्ष्य एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतना है। कोच सुनील शर्मा के अनुसार, भागीरथी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक लाने की अपार क्षमता है। कोच ने यह भी संदेश दिया कि यदि भारत को ओलंपिक जैसे मंचों पर पदक चाहिए, तो प्रतिभाओं को गांवों से चुनना होगा। फिलहाल, भागीरथी एशियन गेम्स के चयन मापदंडों को पूरा करने की उम्मीद के साथ अपनी ट्रेनिंग में जुट गई हैं, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय पटल पर तिरंगा फहरा सकें।

