
भोपाल। छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत के बाद कफ सिरप विवाद और गहरा गया है। मध्यप्रदेश फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की जांच में गुजरात निर्मित री लाइफ और रेस्पिफ्रेस टीआर सिरप में खतरनाक रसायन डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा मानक से कई गुना अधिक पाई गई है। यह वही जहरीला तत्व है, जो पहले कोल्ड्रिफ सिरप में भी पाया गया था।
जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि इन सिरपों में डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 0.1 प्रतिशत तय सीमा से कई गुना अधिक थी, जो किडनी फेल, ब्रेन डैमेज और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। अधिकारियों ने इन दोनों सिरपों पर तत्काल रोक लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
26 से 28 सितंबर के बीच औषधि निरीक्षकों ने प्रदेश भर की दवा दुकानों और अस्पतालों से कुल 19 सिरपों के नमूने जांच के लिए भेजे थे, जिनमें चार सिरप असुरक्षित पाए गए। सरकार ने सभी औषधि निर्माताओं, निरीक्षकों, सीएमएचओ और मेडिकल कॉलेजों को एडवाइजरी जारी कर क्लोरफेनिरामाइन मलेट और फिनाइलफ्रिन एचसीएल जैसे रसायनों के उपयोग में सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके तहत प्रदेश के ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को हटा दिया गया, जबकि उपसंचालक शोभित कोष्टा, जबलपुर के ड्रग इंस्पेक्टर शरद जैन और छिंदवाड़ा के गौरव शर्मा को निलंबित किया गया।
सरकार ने जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट और मंडला जिलों के औषधि निरीक्षकों को शामिल कर एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है, जो पूरे मामले की गहन जांच कर जवाबदेही तय करेगा।
